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Samras Samaj   

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Author Dr. Himanshu Agarwal , Ashok Kumar Beri
Features
  • ISBN : 9789375738916
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Dr. Himanshu Agarwal , Ashok Kumar Beri
  • 9789375738916
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 192
  • Soft Cover
  • 200 Grams

Description

"भारतीय समाज की मूल पहचान उसकी विविधता में निहित एकता रही है। यह विविधता भारत की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी शक्ति है, जब वह समन्वय, सौहार्द और आपसी सम्मान के भाव से पोषित होती है, तभी समाज में विश्वास, सहयोग और सामूहिक प्रगति का वातावरण निर्मित होता है। इसी समन्वित चेतना से समरस समाज का स्वरूप उभरता है, जो न केवल सामाजिक एकता को सुदृढ़ करता है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की मजबूत आधारशिला भी रखता है।

यह पुस्तक 'समरस समाज : विकसित भारत का आधार' इस मूल विचार को केंद्र में रखकर लिखी गई है। इसका उद्देश्य सामाजिक समरसता को केवल एक विषय के रूप में प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि उसे भारतीय संस्कृति, दर्शन और जीवन-मूल्यों से जोड़ते हुए समाज एवं राष्ट्र के निर्माण की आधारभूत शक्ति के रूप में रेखांकित करना है। यह पुस्तक इस तथ्य को स्पष्ट करती है कि किसी भी राष्ट्र का स्थायी और समग्र विकास तभी संभव है, जब समाज आंतरिक रूप से समरस, संगठित और एकात्म भाव से जुड़ा हुआ हो।

आशा है, यह पुस्तक पाठकों में सामाजिक समरसता के प्रति स्पष्ट दृष्टि, सकारात्मक भाव और जिम्मेदार नागरिकता की भावना को सुदृढ़ करेगी तथा उन्हें एक समरस, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेगी।"

The Author

Dr. Himanshu Agarwal

डॉ. हिमांशु अग्रवाल—शोधकर्ता, विचारक, चिंतक एवं अनेक गहन विषयों के दूरदर्शी ज्ञाता, जिन्होंने आधुनिक और आर्ष विज्ञान को जोड़ते हुए समाज और राष्ट्र-निर्माण की दिशा में कार्य करना जीवन का ध्येय बनाया है। उन्होंने आई.आई.टी. रुड़की से पीएच.डी. की उपाधि अर्जित की। वर्तमान में सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। सामाजिक समरसता और सद्भाव उनके लेखन एवं चिंतन के केंद्र में हैं

Ashok Kumar Beri

अशोक कुमार बेरी एक समर्पित समाजसेवी, प्रखर विचारक एवं संवेदनशील राष्ट्रचिंतक हैं, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक स‌द्भाव और समरसता, सांस्कृतिक एकात्मता तथा राष्ट्रनिर्माण के सतत कार्यों को समर्पित किया है। उनका व्यक्तित्व संगठन, सेवा और संवाद-इन तीनों का संतुलित एवं सशक्त समन्वय प्रस्तुत करता है। वर्तमान में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य के रूप में महत्त्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। साथ ही, आपके द्वारा जागरण पत्रिका के माध्यम से सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रनिर्माण की चेतना को व्यापक गति प्रदान हुई।

आपने वर्ष 1969 में भौतिकी (फिजिक्स) विषय में परास्नातक (एम.एससी.) की उपाधि प्राप्त की। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात राष्ट्रसेवा के दृढ़ संकल्प के साथ आपने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक जीवन को स्वीकार किया और स्वयं को पूर्णतः समाज एवं राष्ट्र के कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। तब से आप निरंतर संगठनात्मक दायित्वों का दायित्वबोध, निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन करते आ रहे हैं।

अपनी दीर्घ सेवायात्रा के दौरान आपने संगठन के विभिन्न स्तरों पर महत्त्वपूर्ण उत्तरदायित्व निभाए। लगभग दस वर्षों तक क्षेत्र प्रचारक तथा लगभग दस वर्षों तक प्रांत प्रचारक के रूप में कार्य करते हुए आपने सामाजिक सद्भाव, संवाद, समरसता और सेवा-कार्यों को सुदृढ़ दिशा प्रदान की। इसके अतिरिक्त, आपने सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड क्षेत्र के क्षेत्र सेवा प्रमुख का दायित्व भी संगठनात्मक कुशलता, संवेदनशीलता और समर्पण भाव के साथ निभाया। आपके प्रयासों से समाज के विविध वर्गों के साथ संवाद, विश्वास और सहयोग की भावना को व्यापक आधार प्राप्त हुआ।

आपका सार्वजनिक जीवन सामाजिक असमानताओं, भेदभाव और सांस्कृतिक-आर्थिक विषमताओं को कम करने के सतत प्रयासों को समर्पित रहा है।

आपका विश्वास है कि —"समाज में असमानताओं को दूर करना केवल नैतिक कर्तव्य नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की अनिवार्य आवश्यकता है। विविधता में एकता ही भारत की सच्ची शक्ति है।"

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