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"भारतवर्ष संत, संन्यासी, योगी, ऋषि और तपस्वियों का देश है। भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराएँ, सामाजिक जीवन, राष्ट्रीय और वैश्विक दृष्टिकोण, ज्ञान-विज्ञान सबकुछ इन महात्माओं की अमूल्य धरोहर हैं। सुपरिचित बलिदानी राष्ट्रऋषि, विधर्मी-चक्रविदारण महारथी वेदांत केशरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वतीजी इसी श्रेणी के एक महापुरुष थे। भारतवर्ष के संतों के नभमंडल में स्वामीजी एक चमकते उज्ज्वल नक्षत्र हैं।
स्वामीजी के व्यक्तित्व, पांडित्य और सर्वोपरि धर्मरक्षा के लिए उनका बलिदान सबके लिए एक अकल्पनीय प्रेरणा का स्रोत है। व्यक्ति निर्माण, जनजागरण के लिए संगठन के द्वारा किए गए समस्त कार्यक्रमों में स्वामीजी प्रमुख भूमिका का निर्वाह करते थे। एक संत के रूप में राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि सोचकर राष्ट्ररक्षा की यज्ञवेदी में स्वामीजी के बलिदान की गाथा समस्त संत समाज के लिए एक प्रेरणादायी वार्त्ता है। यह पुस्तक इसी दिशा में एक बलिष्ठ माध्यम की भूमिका निभाएगी।"