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"भारत के स्वतंत्रता संग्राम को धार देने वाले मुख्य रूप से दो प्रकार के आंदोलन रहे हैं। पहला, तिलक-गांधी द्वारा अहिंसा और सत्याग्रह से प्रेरित तथा दूसरा, क्रांतिकारियों द्वारा बल-प्रयोग कर विदेशी शक्ति को मार भगाने की भावना से भरपूर-जिसका नेतृत्व भगत सिंह तथा चंद्रशेखर आजाद जैसे प्रखर क्रांतिकारियों ने किया। यह पुस्तक इस दूसरे प्रकार के स्वाधीनता सेनानियों पर अधिक केंद्रित है, वह भी विशेषकर काकोरी कांड के बाद की अवधि पर, क्योंकि इस काल में क्रांतिकारी आंदोलन वैचारिक रूप से परिपक्व होता जा रहा था। दूसरे चरण का उद्देश्य मात्र स्वाधीनता प्राप्त करना नहीं था, बल्कि वह था स्वतंत्र भारत की नींव रखना- ऐसा भारत, जिसमें संपूर्ण तंत्र भारतीयों द्वारा बनाया गया हो और जिसका लाभ समस्त भारतीयों को मिले। वे स्वतंत्रता चाहते थे, न कि स्वाधीनता।
इस पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को क्रांतिकारियों से परिचय एक सामान्य युवक के रूप में कराना है, ताकि वे हमारे भावनात्मक मित्र बन सकें। प्रस्तुत पुस्तक की विशेषता है कि इसमें संस्मरणों और उपाख्यानों को प्रमुख स्थान दिया गया है, ताकि हम अपने क्रांतिकारियों के व्यक्तित्व और मनोदशा को सही प्रकार से समझ सकें।"
मेरठ (उ.प्र.) में जन्मे ए.के. गांधी वरिष्ठ लेखक तथा अनुवादक हैं। उन्होेंने अनेक पुस्तकों की रचना तथा अनुवाद किया है। सन् 1995 में भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्ति के बाद से ही स्वतंत्र रूप से इस कार्य को कर रहे हैं। उनकी रुचि के क्षेत्र इतिहास, राजनीति विज्ञान तथा व्याकरण हैं। इन तीनों ही क्षेत्रों में उनकी अनेक लोकप्रिय पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें शोधपरक पुस्तकों के लिए जाना जाता है। उनकी भाषा आम आदमी से सीधा जुड़ाव करती है; यह गुण उन्हें लोकप्रिय बनाता है। उन्होंने सी.बी.एस.ई. माध्यम विद्यालयों के लिए भी अनेक पुस्तकों की रचना की है। इसके अतिरिक्त उनके लेख समाचार-पत्रों तथा पत्रिकाओं में भी छपते हैं। वे दो ब्लॉग भी चलाते हैं, जिनमें से meerut-amazing.blogspot.in उनके नगर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति समर्पित है तथा writerakgandhi. blogspot.in छात्रों की विभिन्न प्रकार से सहायता के लिए है। अपने सामाजिक तथा लेखन कार्य के लिए उन्हें मेरठ सांस्कृतिक मंच द्वारा ‘ज्ञानदीप पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है।