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"नेतृत्व के कुछ नियम शाश्वत होते हैं। उनका पालन शक्ति, सामंजस्य और वैधता को दीर्घकाल तक बनाए रखता है। किंतु बदलते समय और परिस्थितियों के दबाव में नेतृत्वकर्ता अकसर इन मूलभूत सिद्धांतों की उपेक्षा कर बैठते हैं। परिणामस्वरूप ऐसी स्थितियाँ जन्म लेती हैं, जो अंततः संक्रमण, अस्थिरता और पतन का कारण बनती हैं।
भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी प्रशांत आनंद, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा, उग्रवाद-रोधी अभियानों तथा आतंकवाद संबंधी मामलों का व्यापक अनुभव प्राप्त है, इस पुस्तक में नेतृत्व के ऐसे ही शाश्वत नियमों पर व्यावहारिक और मौलिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।
प्राचीन भारत के उन्नीस महान् सम्राटों के उदय, शासन और पतन की ऐतिहासिक यात्राओं के माध्यम से यह पुस्तक नेतृत्व और राज-कौशल के उन सिद्धांतों को उद्घाटित करती है, जिन्होंने इतिहास की दिशा निर्धारित की। प्रत्येक अध्याय अतीत की घटनाओं से वर्तमान के लिए व्यावहारिक नेतृत्व-सूत्र प्रस्तुत करता है। स्पष्ट, संतुलित और गहन विश्लेषण से युक्त यह पुस्तक राजनीति, प्रशासन, व्यापार तथा सार्वजनिक जीवन में नेतृत्व कर रहे अथवा नेतृत्व की आकांक्षा रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक मूल्यवान मार्गदर्शिका है।"