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"अश्क बड़ा नादान'- जिंदगी के कैनवास पर रंग बिखेरती कविताएँ -
कविता तेरी शून्य है, मैं भी निपट अजान, मंच सजा के आ करे, आपस में सम्मान ।
क्यों भेजा खर्चा करे, क्यों होता हैरान ? कितने लिख-लिख मर गए, सबको अपनी मान।
शब्दों के व्यापार से, कितने बने महान्, पोथी से मारे मगज, अश्क बड़ा नादान।
ज़िंदगी के कैनवास पर उकेरे गए कविता रूपी ये रंग-बिरंगे शब्द-चित्र आपको भावनाओं की एक अनूठी दुनिया में ले जाएँगे। एक ही पुस्तक में आपको मुख्तलिफ़ जज़्बात और संवेदनाओं के अनेक रंग महसूस होंगे।
इसमें जहाँ एक ओर मन और भावनाओं को छूती अनेक कविताएँ हैं, वहीं राष्ट्र-प्रेम और मानव-प्रेम से संबद्ध भी अनेक रचनाएँ हैं। महाभारत के तीन उपेक्षित, किंतु महान् पात्रों - भीष्म, कर्ण और एकलव्य को लेकर भी तीन विशिष्ट कविताएँ हैं, जिन्हें वर्तमान के परिदृश्य से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
इसके अतिरिक्त संग्रह में हास्य-व्यंग्य की भी अनेक रचनाएँ हैं, जो न सिर्फ आपको गुदगुदाएँगी, बल्कि कुछ गंभीर प्रश्न खड़े करके सोचने पर भी विवश कर देंगी। संग्रह मानव जीवन का एक बाइस्कोप है। रंग-बिरंगे शब्द-चित्र देखिए, पढ़िए और खो जाइए।"