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"कुछ पुस्तकें केवल घटनाओं का लेखा-जोखा नहीं होतीं, वे इतिहास के उन अनकहे अध्यायों का द्वार खोलती हैं, जिन्हें समाज प्रायः केवल समाचारों की सुर्खियों में देखता है।
'संघर्ष' ऐसी ही एक आत्मकथात्मक कृति है। देश के अत्यंत सम्मानित पुलिस अधिकारी प्रकाश सिंह इस पुस्तक में नागालैंड, असम, उत्तर प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के अपने अनुभवों के माध्यम से बताते हैं कि कानून-व्यवस्था केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने की तपस्या है। उग्रवाद, आतंकवाद, नक्सलवाद और संगठित अपराध के विरुद्ध अभियानों का यह वृत्तांत नेतृत्व, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की सजीव गाथा है।
यह कृति पाठक को केवल एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से नहीं, बल्कि वर्दी के भीतर धड़कते उस संवेदनशील मनुष्य से भी परिचित कराती है, जिसने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए पुलिस सुधारों और जनविश्वास से संपन्न पुलिस व्यवस्था के लिए सदैव संघर्ष किया।
'संघर्ष' केवल एक संस्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा, नेतृत्व, कर्तव्यनिष्ठा और अदृश्य संघर्षों की सशक्त अभिव्यक्ति है। इन मूल्यों को समझने वाले प्रत्येक पाठक के लिए यह एक प्रेरक कृति है।"