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"मेरे लिए पैदल चलना केवल एक शौक नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है। इसलिए यह स्वाभाविक ही था कि मैं एक ऐसी चुनौती स्वीकार करूँ, जो चलने से जुड़ी हो। इसे मैं अभी 'जुनून' तो नहीं कहूँगा, लेकिन यह मेरे अस्तित्व का अभिन्न अंग है। भारत में अपने बचपन के दिनों में मैं अकसर शहर की गलियों और पगडंडियों पर बेफिक्र घूमता था। लोगों की दिनचर्या की आवाजें सुनता, खुले चूल्हों से उठती पकवानों की खुशबू महसूस करता, कुओं से पानी खींचने की चर्र-चर्र सुनता, बच्चों को कंचे खेलते और देसी अंदाज में क्रिकेट खेलते देखता, बैलगाड़ियों की आवाज सुनता।
ऐसे ही कुछ दृश्य मैंने मेलबर्न से सिडनी की अपनी यात्राओं में दोबारा महसूस किए। MCG से SCG तक की ये यात्राएँ केवल पैदल चलने का अभ्यास नहीं हैं, बल्कि एक संदेश देने का प्रयास हैं। इन यात्राओं का उद्देश्य स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाना और मैकग्राथ फाउंडेशन की उस महत्त्वपूर्ण भूमिका को सामने लाना है, जो हजारों परिवारों को तब सहारा देती है, जब उनके किसी प्रियजन के कैंसर का निदान होता है।
प्रेरणादायी, साहसी, संवेदनशील, विनम्र और उत्कृष्ट इनसान - यही हैं प्रबोध मल्होत्रा, जिन्होंने मेलबर्न से सिडनी तक बार-बार चलकर स्तन कैंसर के खिलाफ जंग में मैकग्राथ फाउंडेशन का साथ दिया।"
Dr. Prabodh Malhotra— डॉ. प्रबोध मल्होत्रा का जन्म और पालन-पोषण भारत में हुआ। कुछ वर्ष यूरोप में रहने के बाद सन् 1980 में वे ऑस्ट्रेलिया चले गए। प्रबोध ने मैकग्राथ फाउंडेशन को सपोर्ट करने के लिए 71 वर्ष और फिर 72 वर्ष की आयु में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड से सिडनी क्रिकेट ग्राउंड तक 1,000 किमी. से ज्यादा अकेले पैदल यात्रा की। प्रबोध के पास इकोनॉमिक्स में पीएच.डी. है और उन्होंने विक्टोरियन रेलवे और एकेडेमिया में काम किया है।
Dr. Anand Kulkarni—डॉ. आनंद कुलकर्णी ने सरकार, एकेडेमिया और थिंक टैंक में सीनियर पदों पर काम किया है। उनके पास इकोनॉमिक्स में पीएच.डी. है। वे प्रबोध की यात्रा के पक्के समर्थक रहे हैं।