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Samrajya Ka Sahaj Suryasta Hindi Translation of Gentle Setting of The Empire’s Sun   

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Author Raghuvendra Tanwar
Features
  • ISBN : 9789375733485
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Raghuvendra Tanwar
  • 9789375733485
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 144
  • Soft Cover
  • 200 Grams

Description

भारत के स्वतंत्रता संग्राम की कहानी कई रंगों और रूपों वाली है। शायद एक सोची-समझी योजना के तहत केवल एक ही रूप-गांधीवादी 'अहिंसक' और सत्याग्रही धारा-राष्ट्र की स्मृति में गहराई से बस गया। जैसे-जैसे यह संघर्ष आगे बढ़ा, अंग्रेजों को यह विश्वास होने लगा कि उनके साम्राज्य के लिए अधिक गंभीर खतरा उस दूसरे आंदोलन से है, जो देशभक्ति, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गौरव के एक जोशीले मेल से उत्पन्न हुआ था। इस आंदोलन का प्रतिनिधित्व क्रांतिकारियों, गुप्त समितियों और उनके जैसे अन्य लोगों द्वारा किया जा रहा था।

यह मोनोग्राफ (लघु-शोध ग्रंथ) इस बात पर चर्चा करता है कि किस प्रकार अंग्रेजों ने अपने 'खतरे की आशंकाओं' (threat perceptions) के आधार पर स्वतंत्रता सेनानियों को 'खतरनाक' और 'कम खतरनाक' श्रेणियों में वर्गीकृत किया था। खतरे की इन्हीं आशंकाओं ने जेल की स्थितियों और दी जाने वाली सजाओं को निर्धारित किया। लॉर्ड माउंटबेटन ने सन् 1947-48 में भारत के वायसराय और गवर्नर जनरल के तौर पर अपने लगभग 15 महीने के कार्यकाल के दौरान 200 से भी ज्यादा विदाई समारोहों में भाग लिया था। अहम ब्रिटिश अधिकारियों और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच कायम सौहार्दपूर्ण, अनौपचारिक और निजी संबंधों ने एक तरह से स्वतंत्रता आंदोलन के उस भावनात्मक और ब्रिटिश विरोधी मूल कथानक को कमजोर कर दिया था। यह पुस्तक ऐसे अनजाने तथ्यों को अनावृत करती है।

The Author

Raghuvendra Tanwar

शिक्षा : एम.ए. (इतिहास) में प्रथम स्थान व सामाजिक विज्ञान संकाय में सर्वाधिक अंक प्रतिशत हेतु सम्मानित। यू.जी.सी. के राष्ट्रीय फैलो (रिसर्च अवार्डी 2002-2005); अध्यक्ष, पंजाब इतिहास कांग्रेस (मॉडर्न 2001); प्रथम अध्यक्ष, भारतीय इतिहास कांग्रेस (समकालिक 2008) हैं। 
प्रकाशन : रिपोर्टिंग द पार्टिशन ऑफ 
पंजाब : प्रेस, पब्लिक ऐंड अदर ओपिनियन 1947। इस अध्ययन की समीक्षा अनेक विद्वानों द्वारा भारत, यू.के., यू.एस.ए. तथा कनाडा के विभिन्न महत्त्वपूर्ण जर्नलों के लिए की गई। उनकी पुस्तक ‘पॉलिटिक्स ऑफ शेयरिंग पावर : द पंजाब यूनियनिस्ट पार्टी 1923-1947’ को विभाजन के पूर्व पंजाब में विद्यमान राजनैतिक व्यवस्था पर एक महत्त्वपूर्ण एवं सर्वस्वीकार्य शोध के रूप में मान्यता दी जाती है। फ्रैंकली स्पीकिंग : ऐसे ऐंड ओपिनियंस, 1990 के दशक में प्रमुख राष्ट्रीय समाचार-पत्रों में प्रकाशित उनके लेखों एवं विचारों का संकलन है। उनके निरीक्षण में 14 शोधार्थी 
पी-एच.डी. कर चुके हैं। ‘द एसेसिनेशन ऑफ महात्मा गांधी ऐंड द पॉलिटिक्स ऑफ बैनिंग द राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ नामक पुस्तक का प्रकाशन अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली द्वारा 2015 में किया गया। ‘द कश्मीर डिस्प्यूट 1947-48 : ए स्टडी ऑफ अरली कंटेम्पैररी व्यूज ऐंड रिएक्शन’ का कार्य पूर्ण।
प्रो. तंवर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता शैक्षणिक, अधिष्ठाता सामाजिक विज्ञान संकाय एवं कुलसचिव के पदों पर आसीन रहे हैं। उनका विश्वविद्यालय का शैक्षणिक अनुभव लगभग 38 वर्षों का है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में प्रोफेसर एमिरेटस के पद पर कार्यरत हैं।

 

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