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"इस वर्ष भारत 79 वर्ष का हो रहा है और बापू 92 के। नौ दशकों में बापू ने एक देश के जन्म, उसके टूटने-बिखरने और उसकी कई कहानियों को करीब से देखा है।
उन्होंने लोगों के बीच निस्स्वार्थ भाव से काम किया है- संघ के एक प्रचारक के रूप में और जरूरत पड़ने पर शिक्षक, मित्र, नेता और किसान के रूप में भी। वडोदरा में अत्यंत साधारण शुरुआत से बापू ने हमारे राष्ट्र के निर्णायक क्षणों को जिया है - स्वतंत्रता, विभाजन, गांधीजी की हत्या, आपातकाल, प्रारंभिक युद्ध, और नए राजनीतिक दौर का उदय।
यह पुस्तक भारत की एक सच्ची, अनकही कहानी प्रस्तुत करती है, जो आधिकारिक इतिहास से परे समानांतर दृष्टिकोण की दुर्लभ झलक देती है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा भारतीय जनता पार्टी के साथ बापू के गहरे संबंधों को रेखांकित करती है।
'देवदास आपटे बापू : भारत, एक अनकही कहानी' वर्षों के विस्तृत शोध और बापू के साथ लंबे संवादों पर आधारित है। यह 19वीं शताब्दी के मध्य से लेकर आज तक की यात्रा को समेटते हुए भारत की सामाजिक और राजनीतिक यात्रा को एक नई दृष्टि से प्रस्तुत करती है।"