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Tattvadarshi Nishank   

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Author Rishabhdev Sharma
Features
  • ISBN : 9789390366835
  • Language : Hindi
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More Information

  • Rishabhdev Sharma
  • 9789390366835
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 2021
  • 352
  • Hard Cover

Description

‘तत्त्वदर्शी निशंक’ दक्षिण की ओर से हिमालय-पुत्र श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की साहित्य-साधना का अभूतपूर्व संपूर्ण भावाभिनंदन है। इस ग्रंथ में आज चर्चित राजनेता के रूप में प्रतिष्ठित केंद्रीय शिक्षा मंत्री निशंकजी की साहित्य-साधना का दक्षिण भारत की हिंदी-सेवी प्रतिभाओं द्वारा पहली बार समग्र मूल्यांकन किया गया है। बहुआयामी साहित्य-साधक निशंकजी के संपूर्ण रचना-कर्म का कुल छह खंडों में विन्यस्त यह गहन मूल्यांकन अपने आप में एक विलक्षण कार्य है।
आपदा को अवसर में बदलने का संकल्प इस कृति के नायक निशंकजी को ‘तत्त्वदर्शी निशंक’ बनाता है। मनोबल को तोड़ने पर आमादा समेकित दुःखों से विचलित न होते हुए उन्हें ही तोड़नेवाला संघर्षी मन निशंकजी के साहित्यिक व्यक्तित्व का केंद्रबिंदु है। दुःखों को झेल जानेवाला यह मन उन्हें व्यक्तिगत दुःखों से आगे निकलने और समष्टिगत दुःखों को महसूसने की वह शक्ति प्रदान करता है, जिसके बल पर ही कोई व्यक्ति साहित्यकार बनता है। आत्म का यह विस्तार संवेदनशीलता को सृजनात्मकता के पंख देता है। इस ग्रंथ में उनकी इसी संवेदना और सर्जना का संधान किया गया है।
कुल मिलाकर, सार्वजनिक जीवन, समाज सेवा और राजनीति में सक्रिय रहते हुए निरंतर और अबाध साहित्य-सृजन के माध्यम से राष्ट्रभाषा हिंदी को समृद्ध करनेवाले विद्या-व्यसनी रचनाकार निशंकजी के साहित्यिक प्रदेय को समझने के लिए एक अनिवार्य और परिपूर्ण ग्रंथ।

 

The Author

Rishabhdev Sharma

ऋषभदेव शर्मा
जन्म : 4 जुलाई, 1957।
शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी.।
कार्य : पूर्व प्रोफेसर, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मद्रास।
पूर्व खुफिया अधिकारी, इंटेलीजेंस ब्यूरो।
काव्य संग्रह : ‘तेवरी’ (1982), ‘तरकश’ (1996), ‘ताकि सनद रहे’ (2002), ‘देहरी’ (2011), ‘प्रेम बना रहे’ (2012), ‘सूँ साँ माणस गंध’ (2013), ‘धूप ने कविता लिखी है’ (2014)।
आलोचना ग्रंथ : तेवरी चर्चा (1987), हिंदी कविता : आठवाँ-नवाँ दशक (1994), साहित्येतर हिंदी अनुवाद विमर्श (2000), कविता का समकाल (2011), तेलुगु साहित्य का हिंदी पाठ (2013), तेलुगु साहित्य का हिंदी अनुवाद : परंपरा और प्रदेय (2015), हिंदी भाषा के बढ़ते कदम (2015), कविता के पक्ष में (2016), कथाकारों की दुनिया (2017), साहित्य, संस्कृति और भाषा (2021), हिंदी कविताः अतीत से वर्तमान (2021)।
वैचारिकी : संपादकीय, समकाल से मुठभेड़, सवाल और सरोकार, लोकतंत्र के घाट पर, कोरोना काल की डायरी, रामायण संदर्शन।
संप्रति : परामर्शी (हिंदी), मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद।

 

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