₹400
"जून 1945 में डॉ. आंबेडकर की सबसे विवादित पुस्तकों में से एक 'व्हॉट कांग्रेस एंड गांधी हैव डन टू द अनटचेबल्स' (कांग्रेस और गांधी ने अछूतों के साथ कैसा व्यवहार किया) की प्रस्तावना में उन्होंने लिखा, 'मुझे कांग्रेस और श्री गांधी द्वारा अछूतों की स्थिति सुधारने के प्रयासों को उजागर करना ही होगा ताकि अछूतों को और साथ ही उन विदेशियों को भी जानकारी मिल सके, जिन्हें कांग्रेस ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करके अपने पक्ष में कर लिया था।'
80 साल बाद यह पुस्तक फिर इस बात की पड़ताल करती है कि कांग्रेस, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने इन वर्षों में आम तौर पर अछूतों के लिए, विशेष रूप से डॉ. आंबेडकर के साथ कैसा व्यवहार किया है। अपने मूल में यह पुस्तक यह तर्क देती है कि भारत में वंचितों के उत्थान में कांग्रेस, गांधी और नेहरू की भूमिका को समझने का सबसे अच्छा तरीका उनके डॉ. आंबेडकर के साथ हुए टकरावों की जाँच करना है।
डॉ. आंबेडकर 20वीं सदी में मुक्ति के लिए चले पूरे दलित संघर्ष के साक्षात् प्रतीक हैं। इन्हीं महान् हस्तियों के बीच हुए टकरावों, समझौतों, मतभेदों और सुलह के प्रयासों के माध्यम से ही कोई व्यक्ति राजनीतिक स्वतंत्रता और सामाजिक-आर्थिक आजादी के बीच एक अनोखी अदला-बदली (trade off) का गवाह बन सकता है। ये सार्वजनिक बहसें आधुनिक भारत के एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में उभरने की कहानी को सामने लाती हैं।"