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"कल्पना कीजिए 2047 की उस गरमी की - जब भारत अपनी स्वतंत्रता का शताब्दी वर्ष मना रहा हो। तिरंगा आकाश में ऊँचा लहरा रहा है, बुलेट ट्रेनें मैदानों को चीरती हुई आगे बढ़ रही हैं, उपग्रह एक निर्बाध डिजिटल आकाश बुन रहे हैं और तभी उत्सव के बीच एक सायरन की आवाज गूंज उठती है। एक एंबुलेंस निकटतम अस्पताल की ओर दौड़ रही है। उसमें एक पैंतालीस वर्षीय पिता है, जिसे अपने घर के सोफे पर ध्वजारोहण समारोह देखते हुए अचानक एक मूक हृदयाघात (साइलेंट हार्ट अटैक) हुआ है।
ड्राइवर 'विकसित भारत' के चमकते होर्डिंग्स के पास से गुजर रहा है, पर एंबुलेंस के भीतर एक अस्वस्थ राष्ट्र की सच्चाई असहनीय रूप से मुखर है। हमने एक्सप्रेसवे और स्मार्ट सिटीज तो बना लीं, लेकिन सबसे महत्त्वपूर्ण अवसंरचना - मानव शरीर को संघर्ष के लिए छोड़ दिया। एंबुलेंस का यह दृश्य ही वह तसवीर है, जिसे मैं भारत के भविष्य से मिटाना चाहता हूँ और इस पुस्तक को लिखने का मेरा यही उद्देश्य है।
'फिटनेस और भारत @ 2047' केवल जिम टिप्स या डाइट चार्ट का संग्रह नहीं है। यह एक रूपरेखा है- आधा नीतिपत्र और आधी व्यक्तिगत डायरी - जो बताती है कि 1.46 अरब की आबादी वाला राष्ट्र किस प्रकार दैनिक अनुशासन को दीर्घकालिक रोगों पर वरीयता देकर 2047 तक अपने इतिहास की सबसे सशक्त और उत्पादक पीढ़ी बन सकता है।"