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Jigriyan: Dosti, Jugad Aur Siyapa   

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Features
  • ISBN : 9789379740007
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • 9789379740007
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 208
  • Soft Cover
  • 200 Grams

Description

"क्या आपको याद है स्कूल बंक करने का वह रोमांच, समोसे की प्लेट पर होने वाली वे बहसें और पार्क की उस पुरानी दीवार पर बैठकर बुने गए बड़े-बड़े सपने? 'जिगरियाँ' महज एक कहानी नहीं, बल्कि दिल्ली के एक सरकारी स्कूल से शुरू हुई चार यारों अविनाश, तरुण, मानव और धीरज की जिंदगी का एक ऐसा सफरनामा है, जो सीधे आपके दिल में उतर जाएगा।

कहानी के ये चार स्तंभ अपने अनोखे अंदाज, बेफिक्री और 'जुगाड़' के लिए मशहूर हैं। अविनाश जहाँ बिना पिता के साए के अपनी माँ के सपनों को पूरा करने के लिए खाकी वर्दी का संकल्प लेता है, वहीं तरुण अपने परिवार का खोया हुआ सम्मान लौटाने के लिए वकील बनने की राह चुनता है। भारी शरीर वाला धीरज किराने की दुकान से आगे बढ़कर स्विट्जरलैंड की वादियों के सपने देखता है, और दिल का साफ पर थोड़ा उग्र मानव अपनी ही अलग धुन में जीता है। लड़कपन की बेफिक्री के बीच जब इनके जीवन में प्रेम, संघर्ष और जिम्मेदारियों की एंट्री होती है, तो इन चारों की जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। वक्त और हकीकत की कसौटी पर जहाँ बचपन के कुछ ख्वाब टूटते हैं, वहीं कुछ नए रास्ते जन्म लेते हैं। क्या वक्त का तूफान इनके इस अटूट बंधन को बिखेर देगा या इनकी दोस्ती हर सियापे पर भारी पड़ेगी?

हँसी के ठहाकों, आँसुओं की नमी, और कॉलेज के उस आखिरी मोड़ पर खड़े चार दोस्तों की यह दास्ताँ हर उस इनसान के लिए है, जिसने कभी किसी को अपना 'जिगरी' कहा है।"

The Author

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