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Mrityu Kaise Hoti Hai? Phir Kya Hota Hai?   

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Author Rajendra Tiwari
Features
  • ISBN : 9788177213805
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

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  • Rajendra Tiwari
  • 9788177213805
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2018
  • 248
  • Hard Cover

Description

मृत्यु जीवन का अटल सत्य है; यह अवश्यंभावी है। काल को जीतना लगभग दुर्लभ एवं असंभव है। इसलिए जीव मृत्यु के भय में रहता है। अनगिनत-अनजाने प्रश्न और शंकाएँ उसके मन-मस्तिष्क को जकड़े रहती हैं। विज्ञान लेखक श्री राजेंद्र तिवारी ने गहन शोध और अध्ययन करके जटिल व दुरूह ‘मृत्यु’ के बारे में विवेचना की है।
प्रस्तुत पुस्तक उनकी अब तक के प्रयासों से प्राप्त तथ्यों और उनसे निसृत निष्कर्षों की अभिव्यक्ति है। शरीर के अंदर कुछ रहता अवश्य है, जिसके बाहर जाते ही शरीर मृत हो जाता है। वह कुछ क्या है? प्राणों के निष्क्रमण की प्रकिया कष्टदायी है अथवा वस्त्र बदलने की भाँति एक सहज क्रिया? मृत्यु के उपरांत नया परिवेश प्राप्त होने तक आत्मा कहाँ विचरण करती है? क्या पुनर्जन्म होता है? क्या लोक और परलोक हैं? कर्म का सिद्धांत क्या है? क्या सद्कर्म-दुष्कर्म अर्थात् कर्म के रूप भाग्य और भविष्य की रचना करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं? क्या स्वर्ग और नरक हैं? यदि हैं तो कहीं और हैं अथवा इसी पृथ्वी पर?
पुस्तक में मृत्यु के समय एवं मृत्युपर्यंत के अनुभव प्रमाण सहित प्रस्तुत किए गए हैं। संदेश यह है कि ‘सुधर जाओ अन्यथा मृत्यु के समय व पश्चात् कष्ट-ही-कष्ट हैं।’ मृत्यु से भयभीत नहीं होना है, बल्कि जिसने भी मृत्यु के रहस्य को जान लिया, अज्ञात व अंधकारमय प्रश्नों से परदा हटकर ज्ञान के प्रकाश से अवगत हो गया, उसे मृत्यु से कभी भी भय नहीं लगेगा।

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अनुक्रम

प्रस्तावना —Pgs 5

लेखक का निवेदन —Pgs 7

मृत्यु से भय क्यों —Pgs 15

मृत्यु के बाद का रहस्य एवं विज्ञान —Pgs 19

चार्वाक दर्शन एवं इसका उद्भव —Pgs 24

स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर, जीवात्मा एवं आत्मा —Pgs 29

मृत्यु के समय कैसा लगता है —Pgs 34

• शरीर से प्राण निकलने के पूर्व की स्थिति —Pgs 35

• शरीर से प्राण निकलने के बाद की स्थिति —Pgs 37

शरीर से बाहर निकलने का मेरा एक निजी अनुभव —Pgs 40

जीवात्माओं का मुझ (लेखक) से संपर्क —Pgs 42

मेरी माँ की मृत्यु का आभास —Pgs 44

मृत्यु के पूर्व का आभास —Pgs 50

शरीर से प्राण निकलने के रास्ते —Pgs 52

मृत्यु के बाद जीवात्मा की उपस्थिति का आभास —Pgs 53

• नीरजा कांत चौधरी के अनुभव —Pgs 53

मृत्यु के पश्चात् विदेशियों की जीवात्माओं के अनुभव —Pgs 55

मृत्यु के तुरंत बाद के अनुभव —Pgs 65

‘एस्ट्रल प्रोजेक्शन’ क्या है? —Pgs 69

दुर्घटनाओं से हुई मृत्यु के अनुभव —Pgs 70

युक्तेश्वर गिरि की मृत्यु के पश्चात् शिष्य योगानंद से वार्त्ता —Pgs 72

मग्नमयी देवी ने की पति की जीवात्मा से चर्चा —Pgs 75

• बंकिमचंद्रजी की परलोकगत आत्मा का अनुभव —Pgs 78

परलोक : क्या और कैसा —Pgs 86

मृत्यु के पश्चात्-स्थिति पर आचार्य श्रीराम शर्मा का मत —Pgs 88

क्या भूत-प्रेत होते हैं? —Pgs 91

• प्रेतों के संदर्भ में —Pgs 92

• प्रेत अधिकतर कहाँ रहते हैं —Pgs 93

• निरंजन दास धीर का एक अनुभव —Pgs 93

एक हजार वर्ष की प्रेत-योनि में रहा पीर सुलेमान —Pgs 95

मृत्यु के पश्चात् स्थिति पर स्वामी अभेदानंदजी का मत —Pgs 98

• मृत्यु के पश्चात्-जीवात्मा का अस्तित्व —Pgs 103

• जीवात्मा का आह्व‍ान —Pgs 104

• अमेरीकियों के मध्य स्वामी अभेदानंदजी —Pgs 105

• जीवात्मा को बुलाने में मध्यस्थ की भूमिका —Pgs 107

जीवात्मा से संपर्क करने के अनेक साधन हैं —Pgs 112

• प्लेंचिट प्रक्रिया —Pgs 112

• ऑटोमैटिक राइटिंग —Pgs 115

• परलोक से जीवात्माओं के संदेश आते हैं —Pgs 115

जीवात्मा की हुई परिवार से मिलने की इच्छा —Pgs 117

मृत्यु के पश्चात् संत की अात्मा का प्रकटीकरण —Pgs 119

प्रिय स्वजन का मृत्यु के पश्चात् दर्शन —Pgs 122

सूक्ष्म शरीर : बाहर निकलने का एक अनुभव —Pgs 123

डॉक्टर रेमंड ए. मूडी का मत —Pgs 125

मृत्यु के द्वार तक पहुँचे मरीजों के कुछ अनुभव —Pgs 128

मृत्यु के पश्चात् जीवात्माएँ तत्काल अपने शरीर में वापस आईं —Pgs 130

दुर्गा मथरानी की जीवात्मा ने किया परलोक का वर्णन —Pgs 136

अजामिल का प्रसंग —Pgs 142

‘गरुड़ पुराण’ में मृत्यु के बाद का क्या प्रसंग है? —Pgs 147

‘ब्रह्म‍‍सूत्र’ में मृत्यु के समय की स्थिति —Pgs 158

मृत्यु के पश्चात् कर्मों के फल पर एक चिंतन —Pgs 161

परकाया प्रवेश —Pgs 162

• चूडाला का प्रसंग —Pgs 163

• आदि शंकराचार्य का परकाया प्रवेश —Pgs 163

• मत्स्येंद्रनाथजी का परकाया प्रवेश —Pgs 165

• परकाया प्रवेश के अन्य उदाहरण —Pgs 167

मृत्यु की तैयारी कैसे करें —Pgs 171

मृत्यु का अभ्यास —Pgs 174

समय का खजाना —Pgs 179

बौद्ध व जैन धर्म के आईने में परलोक —Pgs 182

• बौद्ध-मत —Pgs 182

• जैन-मत —Pgs 183

क्या पुनर्जन्म होता है? —Pgs 185

पुनर्जन्म का सिद्धांत सार्वभौमिक सत्य है —Pgs 187

पुनर्जन्म में पूर्व जन्म की विस्मृति क्यों हो जाती है? —Pgs 190

पूर्व जन्म एवं पुनर्जन्म पर डॉ. ब्रियान वीस के प्रयोग —Pgs 192

प्रेम के कारण पुनर्जन्म में पुनर्मिलन —Pgs 199

कर्म-फल का परिणाम पुनर्जन्म —Pgs 206

पूर्वजन्म की स्मृतियों के प्रसंग —Pgs 208

निष्कर्ष —Pgs 217

मृत्यु के समय कैसी मानसिकता निर्मित करनी चाहिए? —Pgs 219

मृत्यु के पश्चात् परलोक व सुख मिलने के उपाय —Pgs 221

परलोक संबंधी धारणाएँ स्वयं की मान्यताओं पर आधारित हैं —Pgs 225

‘श्रीमद्भगवतगीता’ में मृत्यु और कर्म-बंधन से मुक्ति के संदेश —Pgs 227

प्रश्नोत्तर —Pgs 238

उद्‍धृत पुस्तक व लेखकों के संदर्भ —Pgs 244

The Author

Rajendra Tiwari
राजेंद्र तिवारी
ख्यातिप्राप्त विचारक एवं चिंतक। राजनीतिक, सामाजिक, प्रशासनिक, आध्यात्मिक व समसामयिक विषयों पर निरंतर लेख प्रकाशित। पारिवारिक पृष्ठभूमि नैतिक मूल्यों की पक्षधर रही है। परिवार में सन् 1947 के पूर्व से वकालत का व्यवसाय हो रहा है। अक्तूबर 1976 से तिवारीजी ने एक सफल अभिभाषक के रूप में अपनी प्रतिष्ठित, ईमानदार, पारदर्शी पहचान बनाई है। सन् 1990 से 1993 तक मध्य प्रदेश शासन के अतिरिक्त शासकीय अभिभाषक एवं सन् 2004 से 2015 तक शासकीय अभिभाषक रहे।

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