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"भारत विश्वासघातियों का शिकार रहा है। इन लोगों के कारण हमको इतिहास में अनेक बार अपमानजनक स्थितियों से गुजरना पड़ा। यदि भारत के विश्वासघातियों को अलग रखकर भारत का इतिहास पढ़ा जाए तो निश्चित रूप से हमारा इतिहास बहुत गौरवशाली है। इतिहास में हम जब भी पराजित हुए हैं, तब हमें किसी विश्वासघाती के कारण ऐसा अपमान झेलना पड़ा है।
प्रस्तुत पुस्तक में भारत के अनेक विश्वासघातियों के कृत्यों के बारे में विस्तार से बताया गया है। इस दृष्टिकोण से यह पुस्तक इतिहास का एक ऐसा दस्तावेज है, जो संबंधित विषय पर समग्रता से प्रकाश डालने में सक्षम है। पुस्तक में कुछ ऐसे तथ्यों को भी स्पष्ट करने का श्लाघनीय प्रयास किया है, जो अन्यत्र मिलने दुर्लभ हैं। कई ऐसे गद्दारों को भी स्थान दिया गया है, जिनके बारे में इतिहास में बहुत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं होती है।
इतिहास से शिक्षा लेकर हमें 'राष्ट्र प्रथम' के आधार पर कार्य करना होगा। जिन लोगों ने अतीत में अपने देश के साथ गद्दारी की, उनके क्रूर-कृत्यों की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए राष्ट्रीय संस्कारों को निखारना होगा।"
राकेश कुमार आर्य
जन्म : 17 जुलाई, 1967 को ग्राम महावड़, जनपद गौतमबुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश) में।
शिक्षा : बी.ए., एल-एल.बी. तक की शिक्षा प्राप्त।
प्रकाशन : ‘भारतीय छात्र धर्म और अहिंसा’ व ‘भारतीय संस्कृति में साम्यवाद के मूल तत्त्व’ सहित अब तक 48 पुस्तकें प्रकाशित।
राष्ट्रवादी समाचार-पत्र ‘उगता भारत’ का संपादन। अखिल भारत हिंदू महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय प्रेस महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष। राष्ट्रीय इतिहास पुनर्लेखन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष।
सम्मान : राजस्थान के राज्यपाल द्वारा सम्मानित; शोध कृति ‘भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास’ को राष्ट्रीय पुरस्कार, विभिन्न विश्वविद्यालयों व सामाजिक संस्थाओं से भी सम्मानित।
निवास : सी.ई. 121, अंसल गोल्फ लिंक, तिलपता चौक, ग्रेटर नोएडा, जनपद गौतमबुद्ध नगर (उ.प्र.)।
दूरभाष : 9911169917