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"वर्तमान पत्रकारिता प्रश्नों के घेरे में है। वर्तमान पत्रकारिता में आई गिरावट की कई वजहों में से एक बड़ी पत्रकारीय मूल्यों का क्षरण भी है। क्रांति और सजगता के प्रतीक भारत में इसे शिद्दत से महसूस किया जा रहा है। कई-कई सवालों के घेरे में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यानी पत्रकारिता पर ये भी आरोप लग रहे हैं कि लोकतंत्र की अन्य संस्थाओं की तरह यह भी अपनी मर्यादा भुला बैठी है। पत्रकारिता को लोकतंत्र के अन्य तीन स्तंभों-कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका का पहरुआ माना जाता है और यह दायित्व भारतीय संदर्भ में हिंदी पत्रकारिता का कुछ ज्यादा ही है, क्योंकि भारत की बड़ी जनसंख्या इसे बोलती-समझती है।
प्रस्तुत पुस्तक 'पत्रकारिता का प्रश्नकाल' में ऐसे ही कुछ सवालों से टकराने का प्रयास किया गया है, जिनमें पत्रकारिता और उसके माध्यमों की आत्मा समाहित है। आठ अध्यायों में विभक्त इस पुस्तक में पत्रकारिता के सवाल, पत्रकारिता की विश्वसनीयता, पत्रकारिता का वर्तमान, पत्रकारीय स्वतंत्रता की महत्ता, मीडिया घरानों की दशा-दिशा, बिहार की पत्रकारिता : क्रांति से भ्रांति तक एवं मीडिया के कॉरपोरेट गठजोड़ के जरिए आज की पत्रकारिता की पड़ताल की एक कोशिश है।
मीडिया के अध्येताओं, पत्रकारिता के छात्रों, राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारिता में सक्रिय लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी पुस्तक ।"
राकेश प्रवीर जन्म : 16 अप्रैल, 1966 को बिहार के पूर्वी चंपारण के एक गाँव भोपतपुर बझिया में।
शिक्षाः स्नातकोत्तर (अर्थशास्त्र)।
आजीविका : विगत 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय। 15 वर्षों से पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में मीडिया अध्यापन। प्रिंट मीडिया में ढाई दशकों के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी दो वर्षों का कार्यानुभव।
रचना-संसार : 'थारु जाति : पहचान के लिए संघर्षरत जनजाति' (2004 में) बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी, पटना से प्रकाशित। आठ कोस की यात्रा' लघुकथासंग्रह में पच्चीस लघुकथाएँ प्रकाशित। कविता, कहानियों के एक दर्जन से ज्यादा संग्रहों में रचनाएँ शामिल। डेढ़ हजार से अधिक आलेख, समीक्षात्मक निबंध, कविता, कहानी एवं लघुकथाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। बिहार एवं झारखंड के जनजातीय समाज पर विशेष कार्य। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन केंद्र पटना से वार्ता, आलेख, कहानी एवं कविताओं आदि का नियमित प्रसारण।
सम्मान-पुरस्कार : विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं की ओर से सृजनात्मक पत्रकारिता, कहानीलेखन एवं काव्य-कर्म के लिए सम्मानपुरस्कार।