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"दिनांक 12 व 13 मई, 2023 को केवड़िया, गुजरात में 55 ऐसे दंपती जुटे, जिन्होंने अपने विवाह के 55 वर्ष पूरे किए तथा 55 ऐसे नवविवाहित दंपती, जिनके विवाह को एक वर्ष से भी कम समय हुआ था। उन दंपतियों का मिलन ऐसे वातावरण में हुआ, जहाँ दो दिन यह चिंतन चला कि परिवार में खुश कैसे रह सकते हैं; हम एकता के सूत्र में बँधे कैसे रह सकते हैं। जैसे किसी प्रशिक्षण शिविर में सत्र संचालित होते हैं, वैसे ही इस दो दिवसीय खुशहाल सम्मेलन में सत्र भी संचालित हुए, सभी प्रतिभागियों ने भाग लिया और एक संकल्प लेकर भी निकले कि भविष्य में हम हमारे जीवन को खुशहाल बनाएँगे और एकता के सूत्र में बँधे रहेंगे।
इस सम्मेलन में निम्नलिखित सूत्र निकले, जो दीर्घ-सुखी-सफल-संतुष्ट दांपत्य जीवन का आधार बन सकते हैं-
जीवन में पति-पत्नी को एक-दूसरे से जीतने की चेष्टा से बचना चाहिए।
दांपत्य जीवन में जब भी कभी दरार महसूस हो तो दरार को पाटने का कार्य करना चाहिए।
लोगों से घुलना-मिलना चाहिए।
वर्तमान में जीने की आदत डालनी चाहिए।
धन्यवाद देने का अभ्यास करना चाहिए।
संबंधों को सहेजकर, पारस्परिकता और सम्मान भाव रखकर दांपत्य जीवन को सुखद-संतुष्ट बनाने की एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका है यह पुस्तक।"