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"नीले आकाश का सच' एक ऐसा उपन्यास है, जो बिहार व झारखंड की सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक सच्चाइयों को बेहद रोचक ढंग से पाठकों के सामने प्रस्तुत करता है। इसमें उन हालातों का जीवंत चित्रण है, जिनसे आम जनता दशकों से जूझती रही है।
इस पुस्तक में बिहार के घपले-घोटालों की परतें खोलते हुए दिखाया गया है कि किस तरह भ्रष्टाचार ने व्यवस्था की जड़ों को खोखला किया। लालू प्रसाद-राबड़ी देवी राज के रोचक किस्से, उनकी राजनीतिक चालबाजियाँ और सत्ता की सच्चाई पाठकों को सोचने पर मजबूर करेगी। लेखक ने सत्ता और जनता के बीच के संबंधों को इस तरह उकेरा है कि पाठक खुद को उसी दौर का साक्षी महसूस करेगा।
पुस्तक की एक खासियत यह भी है कि इसमें बिहार के बँटवारे और झारखंड के गठन की ऐतिहासिक घटना को बेहद प्रभावशाली ढंग से रखा गया है। झारखंड के अस्तित्व में आने की पीड़ा और संघर्ष को लेखक ने संवेदनशीलता से चित्रित किया है।
ब्यूरोक्रेसी में व्याप्त करप्शन और अफसरशाही की चालबाजियों को भी इसमें बेबाकी से उजागर किया गया है। आम आदमी के संघर्ष और उसकी आवाज कैसे खो जाती है, यह कहानी बार-बार उभरती है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष है, जो सच जानने और समाज की गहराइयों को समझने की जिज्ञासा रखते हैं। लेखक ने पशुपालन (चारा) घोटाले के साथ-साथ कई अन्य मुद्दों पर जो प्रामाणिक तथ्य पेश किए हैं, वे देश भर के पत्रकारों के लिए नजीर जैसे हैं।"