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राजनीति के नीलकंठ : शिव प्रताप शुक्ल' मूल्यों की निरंतरता का सशक्त दस्तावेज हैं। यह पुस्तक गोरखपुर की माटी से निकले एक सामान्य युवक के असाधारण बनने की प्रेरक यात्रा को रेखांकित करती है। शिव प्रताप शुक्ल का जीवन 'नदी की निरंतरता और 'पहाड़ जैसी अडिगता का अद्भुत संगम है। विद्यार्थी जीवन से ही उनमें नेतृत्व के गुण परिलक्षित हुए तथा संगठन एवं राजनीति के समृद्ध अनुभवों ने उन्हें 'व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के मूल मंत्र को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। आपातकाल, जेपी आंदोलन और 14 वर्षों का सत्ता-वनवास-हर संघर्ष ने उनके धैर्य, अनुशासन और संकल्प को प्रखर और मुखर बनाया।
यह कृति दर्शाती है कि सफलता अदृश्य त्याग माँगती है। हर आलोचना शत्रुता नहीं होती, कुछ मन को परिष्कृत करती हैं, कुछ मौन को दृढ़ बनाती हैं। अनुशासन, संगठन-निष्ठा और अंत्योदय उनके सार्वजनिक जीवन के आधार रहे।
यह पुस्तक भारतीय लोकतंत्र की उस जीवंत परंपरा का प्रतिबिंब है जहाँ जनसेवा से नेतृत्व विकसित होता है। यह शिव प्रताप शुक्ल के प्रेरक जीवन, विचार और सार्वजनिक योगदान का तथ्यात्मक एवं विनम्र प्रस्तुतीकरण है।