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BUDDHA, TUM LAUT AAO   

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Author Dr. Dinkar Joshi
Features
  • ISBN : 9789355625489
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Dr. Dinkar Joshi
  • 9789355625489
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2025
  • 256
  • Soft Cover
  • 350 Grams

Description

हमें बताया जाता है कि महात्मा बुद्ध ने वैदिक परंपरा से असंतुष्ट होकर अपना पथ अलग बनाया था, इसीलिए तत्कालीन वैदिक परंपरा ने उनको स्वीकार नहीं किया। उनके दर्शन को 'नास्तिक दर्शन' कहकर अवहेलना की गई। इतना ही नहीं, उन्हें हिंदू-विरोधी दरशाकर-मानकर तिरस्कृत किया जाता रहा। सदियों के बाद उन्हें विष्णु के दशावतार में नौवें अवतार के रूप में स्वीकृत किया जा सका। इतिहास की यह भारी विडंबना है कि जिस धरती पर बुद्ध ने पहली बार बुद्धत्व के प्रकाश को प्रसारित किया, उसी धरती से बौद्ध धर्म और स्वयं बुद्ध भी लगभग अदृश्य हो गए।

वैदिक परंपरा में पले हुए राजकुमार सिद्धार्थ को जब प्रतीत हुआ कि जीवन से जुड़े हुए जन्म, जरा, मृत्यु आदि निषेधकों के साथ ही प्रेम, पारस्परिक संबंध, परिवार इत्यादि विषय भी आजीवन प्रश्न ही पैदा करते हैं, तब उन्होंने इन प्रश्नों पर पूर्णविराम लगाने के मार्ग ढूँढ़ने के लिए कड़ी तपश्चर्या का आरंभ किया। इन प्रश्नों के उत्तर उन्होंने तो पा लिये और अपने इस नए मार्ग के प्रति उन्होंने सारे विश्व को उन्मुख भी किया, परंतु सारा विश्व इस मार्ग की ओर देखना चूक गया और आज शताब्दियों के पश्चात् भी जिस उँगली ने इस मार्ग को दिखाया, उस उँगली की ओर ही देखता रहा।

अब महात्मा बुद्ध तो हमारे बीच में नहीं रहे। प्रश्नों का उत्तर होने के बावजूद विश्व उन प्रश्नों से आज भी अत्यंत पीड़ित हो रहा है। इस केंद्रवर्ती विचार के साथ उपन्यास 'प्रश्नों पर पूर्णविराम' 2008 में पहली बार प्रकाशित हुआ था। अब ऐसा प्रतीत होता है कि भगवान् बुद्ध ने जिन उत्तरों को प्रस्तुत किया था, उन्हें जब हम आत्मसात् नहीं कर पाए हैं, तब क्यों न उन भगवान् को ही निवेदन करें - 'बुद्ध ! तुम लौट आओ'।

The Author

Dr. Dinkar Joshi

डॉ. दिनकर जोशी—जन्म : 30 जून, 1937 को भावनगर, गुजरात में।
डॉ. दिनकर जोशी का रचना संसार अत्यंत व्यापक है। 45 उपन्यास, 12 कहानी-संग्रह, 13 संपादित पुस्तकें, महाभारत व रामायण विषयक 9 अध्ययन ग्रंथ और लेख, प्रसंग चित्र, अन्य अनूदित पुस्तकों सहित अब तक उनकी कुल 154 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें गुजरात राज्य सरकार के 5 पुरस्कार, गुजराती साहित्य परिषद् का उमा-स्नेहरश्मि पारितोषिक तथा गुजरात थियोसोफिकल सोसाइटी का मैडम ब्लेवेट्स्की अवार्ड प्रदान किए गए हैं । राजस्थान स्थित जे.जे.टी. यूनिवर्सिटी द्वारा डी.लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित ।

उनके ग्रंथों में जीवन कथनात्मक उपन्यासों का विशेष योगदान है। गांधीजी के ज्येष्ठ पुत्र हरिलाल, गुरुदेव टैगोर, तथागत बुद्ध, काउंट लेव टॉलस्टॉय और सरदार पटेल की जीवनी पर आधारित आपके उपन्यास एवं रामायण-महाभारत पर केंद्रित कई पुस्तकें हिंदी, मराठी तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड, ओड़िया, बांग्ला, अंग्रेजी और जर्मन में अनूदित हो चुकी हैं।

देश की विभिन्न 6 भाषाओं में एक साथ 15 पुस्तकें प्रकाशित होने की घटना को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में स्थान मिला। उन्होंने संपूर्ण महाभारत के गुजराती अनुवाद के 20 ग्रंथों के संपुट का संपादन किया है। गुजराती साहित्य के सत्त्वशील ग्रंथों को अन्य प्रादेशिक भाषाओं में प्रकाशित करने में संलग्न।

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