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"यह पुस्तक मौलिक रूप से ऑनरेरी कैप्टन मोहर सिंह की लेखनी है। यह 1943-71 के समयकाल में लिखी गई एक सैनिक की डायरी है, जिसे सुनीता बैंसला ने सूत्रधार की भूमिका में प्रस्तुत किया है। यह भारतीय इतिहास से जुड़े एक महत्त्वपूर्ण कालखंड के बारे में एक साधारण सैनिक के असाधारण जीवन और दृष्टिकोण को दरशाती है। सैनिकों के आपसी प्रेम, समर्पणभाव, कर्तव्यनिष्ठा और देश के प्रति अटूट प्रेम की भावनाओं का सुंदर आईना है।
सन् 1943 में भारतीय सेना में सिपाही भर्ती हुए मोहर सिंह ने 28 साल सेवाएँ दीं और ऑनरेरी कैप्टेन के पद से सेवानिवृत्त हुए। कश्मीर में 1947-48 और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भागीदारी निभाई। हथियारों के प्रयोग में विशेष निपुणता और वनस्पति से गहरा लगाव उनके विशिष्ट गुण थे।
यह समयकालीन डायरी युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरित करेगी।"