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"भारत की जिस समृद्ध वाचिक परंपरा ने सदियों से राष्ट्र की चेतना को शब्दों के माध्यम से जाग्रत् और प्रेरित किया है, यह काव्य-संग्रह उसी परंपरा का एक जीवंत दस्तावेज है। भूषण, चंदरबरदाई और दिनकर जैसे महान् कवियों से लेकर समकालीन रचनाकारों तक इस परंपरा ने युद्धकाल और विपरीत परिस्थितियों में सेना के साहस, बलिदान और राष्ट्र-नेतृत्व के संकल्प को स्वर दिया है। प्रस्तुत पुस्तक ऑपरेशन सिंदूर के ऐतिहासिक संदर्भ में रचित कविताओं का संकलन है, जिसमें देश-विदेश के हिंदीभाषी कवियों की भावनाएँ एक सूत्र में पिरोई गई हैं।
इस संग्रह की विशेषता यह है कि इसमें चार-पाँच पीढ़ियों के कवियों की सहभागिता है, जो इसे एक व्यापक और कालातीत दृष्टि प्रदान करती है।
22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में पाक आतंकियों द्वारा अनेक निर्दोष भारतीयों की निर्मम और नृशंस हत्या की अमानवीय घटना के पश्चात् भारतीय सेना द्वारा प्रदर्शित अदम्य साहस और देश के सक्षम नेतृत्व में दिए गए सशक्त संदेश को इन कविताओं में सजीव रूप से अभिव्यक्त किया गया है। यह पुस्तक न केवल भारतीय सेना का शौर्यगान है, बल्कि देश के वर्तमान नेतृत्वकर्ता प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी की दृढ़ता, क्षमता, राष्ट्रभक्ति, संयम और संकल्प का काव्यमय अभिलेख भी है, जो पाठकों के मन में गर्व और प्रेरणा का संचार करता है।"