Prabhat Prakashan, one of the leading publishing houses in India Careers | Dealers | Download Catalogues
Helpline: +91-7827007777

Galat Train Mein   

₹150

Out of Stock
  We provide FREE Delivery on orders over ₹1500.00
Delivery Usually delivered in 5-6 days.
Features
  • ISBN : 8173153639
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information about International Finance: Theory and Policy, 10th ed.

  • 8173153639
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2010
  • 110
  • Hard Cover

Description

' यह क्या, बाबूजी, आप खुद ही चले आए! मैं आपको बुलाने जा ही रहा था । '' दिल खोलकर हँस पड़े निखिल हालदार । बोले, '' मैंने सोचा, देखूँ तो सही कि रास्ता ढूँढने में गलती करता हूँ या नहीं । लग रहा है, ईंट-पत्थर ही सबसे भरोसेमंद होते हैं । जरा भी नहीं बदलते । '' फिर वही सेंटीमेंट । नहीं । ऐसे और कितनी देर तक काम चलेगा? उन्हें असली दुनिया में खींचकर न लाने से यही चलता रहेगा । '' बाबूजी, यह है आपकी बहू । '' '' हाँ! ओह! रहने -दो, बहू । वाह! बहुत अच्छा । यह देखो बहू एक और बूढ़े बच्चे का झमेला तुम्हारे कंधे पर आ पड़ा । '' '' झमेला क्यों कहते हैं, बाबूजी? कितनी खुशी हो रही है हम लोगों को ।. .कल से. .कल आप आए नहीं । कल तो हम लोग एकदम.. .बाद में इतना बुरा लगा । '' '' मत पूछो, बहू । नसीब का लिखा कल जो झमेला गया, तुम लोग सुनोगे तो ' बाबूजी कितने बुद्धू हैं ' कहकर हँसोगे । कल गलत ट्रेन पर चढ़ गया था । इसी से यह गड़बड़ी हुई । '' '' गलत ट्रेन में!'' '' वही तो । नसीब में भुगतना लिखा था । स्टेशन पहुँचा तो... '' -इसी पुस्तक से
इस उपन्यास की नायिका सुचरिता, जो नायक निखिल की पत्‍नी है, एक स्वाभिमानी नारी है । वह अपने भाग्य की विडंबना को, अपने पति के गलत निर्णयों को जीवन भर सिर उठाकर झेलती है, पर अंत में उसका साहस साथ छोड़ जाता है; अपने पति की एक अंतिम गलती के लिए वह उसे क्षमा नहीं कर सकी और जीवन के आगे हार गई । प्रसिद्ध बँगला उपन्यासकार आशापूर्णा देवी की सशक्‍त लेखनी से निःसृत अत्यंत हृदयस्पर्शी कृति, जो पाठकों के मानस-पटल पर वर्षो छाई रहेगी ।

The Author

Customers who bought this also bought

WRITE YOUR OWN REVIEW