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"प्रस्तुत पुस्तक डॉ. भीम सिंह भवेश की साहित्यिक यात्रा, समाज और संस्कृति के प्रति उनके गहन समर्पण की मिसाल है। इसमें भवेशजी की कृतियों का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है, साथ ही उनके सामाजिक कार्यों और साक्षात्कारों को भी इसमें सम्मिलित किया गया है। 'नेम प्लेट' से लेकर 'हाशिए पर हसरत', 'कलकत्ता से कोलकाता' और 'सान्निध्य का संस्मरण' तक, भवेशजी की साहित्यिक यात्रा समाज के हाशिए पर खड़े लोगों की पीड़ा और आकांक्षाओं को स्वर देती है।
उनकी लेखनी में पत्रकारिता की पैनी दृष्टि और साहित्य की गहन संवेदना का अद्भुत संगम दिखाई देता है। भवेशजी की रचनाओं में अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं-कहीं आत्मीयता, कहीं सामाजिक चेतना, कहीं पत्रकारिता की पैनी दृष्टि और कहीं सांस्कृतिक बदलाव का चित्रण। यही विविधता उन्हें हिंदी साहित्य में विशिष्ट स्थान दिलाती है। यह पुस्तक केवल एक साहित्यकार की यात्रा नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति के प्रति समर्पण गाथा है।"