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Aankhin Dekhi, Antar Lekhi   

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Author Anand Aadeesh
Features
  • ISBN : 9789380823133
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Anand Aadeesh
  • 9789380823133
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2011
  • 120
  • Hard Cover

Description

मन तुरंग को साधना बेहद टेढ़ी खीर।
वश में कर सकता इसे कोई एक कबीर।।

आता है जीवन भरा, जाता खाली खोल।
मानव की भी त्रासदी ज्यों कुएँ की डोल।।

बोल तोलकर बोलना, थी पुरखों की सीख।
मौन रतन अनमोल है, दो दमड़ी की चीख।।

नेता का हर शब्द जब कहलाए कानून।
समझो तानाशाह को चढ़ने लगा जुनून।।

पानी से रोशन किए, जिसने बुझे चिराग।
उस रूहानी आग में क्या तेरा कुछ भाग।।

केवट का क्या भाग्य जगत को पार लगाता।
दो कूलों के बीच स्वयं बस आता-जाता।।

ऐंठें हम सौ बार पर झुक भी लें दो बार।
दुखिया की दहलीज पर, दाता के दरबार।।

सहनशीलता संस्कार तो सागर ने पाया।
जो छाती पर चढ़ा उसे भी पार लगा लाया।।

आओ चलो मॉल अपने से कुछ खरीद कर आएँ।
बीस ग्राम मिट्टी, चुल्लू भर जल/वायु भर लाएँ।।

बार-बार पढ़ते रहें पुरखों लिखे निबंध।
नत-मस्तक धारण करें शीतल मंद सुगंध।।

The Author

Anand Aadeesh

जन्म : उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ (अब बागपत) अंतर्गत ग्राम खेकड़ा के संभ्रांत, सुशिक्षित, समाजसेवी, जमींदार वैष्णव परिवार में।
शिक्षा : हिंदी, अंग्रेजी एवं शिक्षा विषयों में स्नातकोत्तर तथा शोधार्थी।
पद/दायित्व : पूर्व प्राचार्य; निदेशक, ब्यूरो ऑफ टैक्स्ट बुक्स; सदस्य, हिंदी अकादमी, दिल्ली; राष्‍ट्रीय महासचिव, अखिल भारतीय साहित्य परिषद्।
प्रकाशन : हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा में एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित।
संप्रति : स्वान्त: सुखाय स्वाध्याय एवं स्वतंत्र लेखन।

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