Prabhat Prakashan, one of the leading publishing houses in India eBooks | Careers | Publish With Us | Dealers | Download Catalogues
Helpline: +91-7827007777

Smritiyan

₹200

In stock
  We provide FREE Delivery on orders over ₹1500.00
Delivery Usually delivered in 5-6 days.
Author Garima Sanjay
Features
  • ISBN : 9789382898405
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1
  • ...more

More Information about International Finance: Theory and Policy, 10th ed.

  • Garima Sanjay
  • 9789382898405
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1
  • 2013
  • 160
  • Hard Cover
  • 330 Grams

Description

‘हाय, नीतू! कैसी है?’ उसकी बचपन की सहेली, मीनाक्षी का फोन था।
‘अच्छी हूँ, मीनाक्षी। तू बता, इस समय कैसे फोन किया?’
‘बस, तेरी याद आई, और फोन मिला दिया !’
‘यहाँ शाम के आठ बजे हैं, यानी इस समय वहाँ सुबह के साढ़े छह बज रहे होंगे। तू कहना चाहती है कि आज इतनी सुबह तुझे मेरी याद आ रही थी?’ इस बार नीतू हँस पड़ी थी!
‘उँह! तुझसे तो बात करना ही बेकार है। ले अपने भैया से बात कर।’
‘कैसी है नीतू?’ विजय भैया की आवाज हमेशा ही उसे खुशी देती थी। खुश न हो, तब भी उसे आवाज से खुश दिखना होता था। वह कहीं आवाज के जरिए उसके दर्द में न झाँक लें!
‘अच्छी हूँ, भैया। आप सुनाइए, ऐसी कौन सी खबर है, जो आप लोगों ने इस समय फोन किया?’
‘हम्म! बड़ी सयानी है, तू!’
नीतू फीकी सी हँसी हँस दी थी।
‘खबर यह है कि अभी-अभी ओम का फोन आया था। भारद्वाज आंटी की डेथ हो गई।’
—इसी पुस्तक से
बीते जीवन की स्मृतियाँ ही मानव की सबसे बड़ी धरोहर होती हैं। अपनी खुशनुमा स्मृतियों में व्यक्‍ति विकट वर्तमान को भी भूल जाता है। स्मृतियों के ऐसे ही तानों-बानों से बुना है मर्मस्पर्शी उपन्यास ‘स्मृतियाँ’।

The Author

Garima Sanjay

इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय से प्राचीन इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएट, पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा सहित प्रसिद्ध फिल्मकार कृष्णा शाह की फिल्म निर्माण की कार्यशाला में दक्षता प्राप्‍त। अब तक अनेक सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए कार्य, जैसे फिल्म्स डिवीजन, एन.एफ.डी.सी., दूरदर्शन, गृह मंत्रालय, यू.एन.डी.पी., यू.एन.ऐड्स, डिस्कवरी चैनल, उपभोक्‍ता एवं खाद्य मंत्रालय, इग्नू, स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग आदि। बी.बी.सी., ट्रांसटेल, डिस्कवरी चैनल आदि के लिए विविध डॉक्यूमेंटरी फिल्मों के हिंदी अनुवाद एवं डबिंग के कार्य। यूनिसेफ के लिए मिडिटेक के टेलीविजन सीरियल ‘क्योंकि जीना इसी का नाम है’ के अनुवाद एवं सब-टाइटल का कार्यभार भी सँभाला। अनेक रेडियो प्रोग्राम का लेखन जिनमें शामिल हैं—उपभोक्‍ता एवं खाद्य मंत्रालय की रेडियो श्रृंखला ‘जागो ग्राहक जागो’, आकाशवाणी एवं विज्ञान प्रसार के लिए विविध रेडियो सीरीज। विविध प्रकाशकों एवं संस्थाओं के लिए लेखन एवं अनुवाद कार्य।
संप्रति नई दिल्ली में लेखिका, पटकथा लेखिका, अनुवादिका और वृत्तचित्र निमाता/निर्देशिका।

Customers who bought this also bought

WRITE YOUR OWN REVIEW