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आज तक रहस्यमय लोक रहस्य ही बना हुआ है। जो लेखक, तांत्रिक, उपन्यासकार अपनी लेखनी उठाते भी हैं, तो उस रहस्यमय लोक से परदा नहीं उठाते बल्कि उसे और रहस्यमय बना देते हैं। इस कारण आज के अनेक युवा गहन वनों, पर्वतों, तिब्बत के पर्वतीय भागों में खाक छानते हुए अपने प्राण गँवा देते हैं। जो युवक अपने अंदर के रहस्यमय लोक को देख लेगा, उसके सिर से बाहर का, पृथ्वी का, अंतरिक्ष का रहस्यमय लोक खुल जाएगा। फिर वह इसी शरीर से या इस शरीर को सुरक्षित रखकर अपने सूक्ष्म शरीर, कारण शरीर, आत्म शरीर से सुगमतापूर्वक यात्रा कर सकता है। यह यात्रा कठिन नहीं है, न ही दुस्साध्य है। आवश्यकता है, आपको अपने अंदर की पात्रता की, श्रद्धा-सेवा एवं समर्पण की।