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"रामबहादुर राय, पिता श्री शिवदत्त राय, माँ श्रीमती फूलवती देवी, जन्म 4 फरवरी, 1946 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में स्थित रेवतीपुर गाँव (ननिहाल) में हुआ; मूलत : सोनाड़ी गाँव, गाजीपुर के निवासी । दस्तावेजों में जन्मतिथि 1 जुलाई, 1946 दर्ज है। प्रारंभिक शिक्षा मालदा (बंगाल) और गाजीपुर में। पिता किसान थे। किशोरावस्था में कम्युनिस्ट नेता सरजू पांडे से प्रभावित; सन् 1965 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र रहते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़े।
सन् 1971 में जयप्रकाश नारायण और 1972 में गोविंदाचार्य के संपर्क में आए। नवंबर 1973 में बिहार आंदोलन के सूत्रधार बने। जेपी आंदोलन के दौरान मीसा में 9 अप्रैल, 1974 को पहली गिरफ्तारी। आपातकाल के दौरान डी.आई.आर. में बनारस में गिरफ्तार हुए। अक्तूबर 1979 में जेपी के निधन के बाद पत्रकारिता में जाने का फैसला। शुरुआत हिंदुस्थान समाचार से। अप्रैल 1983 में प्रभाष जोशी के नेतृत्ववाली जनसत्ता लॉञ्चिंग टीम के हिस्सा बने, इसके बाद 1986 में नवभारत टाइम्स में राजेंद्र माथुर के साथ। 1991 में उनके निधन के बाद जनसत्ता वापसी, वहाँ वर्ष 2004 तक सेवारत रहे। 2006 में 'प्रथम प्रवक्ता' पत्रिका से जुड़े; लेकिन 2010 में वहाँ से मुक्त हो गए। 15 अगस्त, 2013 को 'यथावत' पत्रिका की शुरुआत। 2016 से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष हैं।
प्रकाशित पुस्तकें : 'मंजिल से ज्यादा सफर' (पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की जीवनी); 'रहबरी के सवाल' (पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जीवनी); 'शाश्वत विद्रोही राजनेता: आचार्य जे.बी. कृपलानी' (आचार्य जे.बी. कृपलानी की जीवनी); 'भारतीय संविधान की अनकही कहानी' (हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं में); 'भानुप्रताप शुक्ल : व्यक्तित्व एवं विचार' ।"
जन्म और संस्कार पाया काशी में। समाज, प्रकृति, उत्सव, संस्कृति का ज्ञान यहीं हुआ। शब्द, तात्पर्य और धारणाओं की समझ भी वहीं बनी।
नौकरी के लिए लखनऊ में रहे। वहीं राजनीति के बहुलवादी चरित्र, समाज परिवर्तन, सांप्रदायिकता, दलित-उभार, चुनाव संबंधी अध्ययन हुआ। पंद्रह साल तक जनसत्ता के राज्य संवाददाता रहने के बाद दो साल हिंदुस्तान, लखनऊ में संपादकी की। फिर लंबे अर्से तक टीवी पत्रकारिता । अब दिल्लीवास। लेकिन बनारस भी छूटा नहीं।
अयोध्या आंदोलन को काफी करीब से देखा। ताला खुलने से लेकर ध्वंस तक की हर घटना की रिपोर्टिंग के लिए अयोध्या में मौजूद इकलौते पत्रकार। |
व्यवस्थित पढ़ाई के नाम पर बी.एच.यू. से हिंदी में डॉक्टरेट। लिखाई में समकालीन अखबारी दुनिया में कलम घिसी। कितना लिखा? गिनना मुश्किल है। गिनने की रुचि भी कभी नहीं रही। भारतेंदु समग्र का संपादन जरूर याद है। कैलास-मानसरोवर की अंतर्यात्रा कराती पुस्तक द्वितीयोनास्ति' बहुचर्चित । व्यक्ति, समाज, समय, उत्सव, मौसम पर केंद्रित किताब 'तमाशा मेरे आगे' बहुपठित। ।
राजनीति, समाज, परंपरा को समझने और पढ़ने का क्रम अब भी अनवरत जारी।
पहले लेखन को गुजर-बसर का सहारा माना, अब जीवन जीने का। संपर्क : जी-180, सेक्टर-44, नोएडा।
इ-मेल : hemantmanusharma@gmail.com