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"भारत में मातृ मृत्यु दर अभी भी चिंताजनक है वर्ष 2023 में यह भावित प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 88 थी। गर्भावस्था केवल शरीर की बदलती हुई शारीरिक अवस्था नहीं है, बल्कि इसके गहरे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रभाव होते हैं। कई बार शरीर में होने वाले ये परिवर्तन दूरगामी परिणाम उत्पन्न करते हैं। एक प्रतिष्ठित स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा लिखित तथा वास्तविक कहानियों से प्रेरित 'स्त्री रोग विशेषज्ञ की गाथाएँ' गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं, उनसे जुड़ी भ्रांतियों और अंधविश्वास, तथा प्रसवोत्तर अवसाद जैसी भावनात्मक रूप से झकझोर देने वाली परिस्थितियों का संवेदनशील चित्रण करती है।
इन मार्मिक कथाओं में उन विषयों को भी स्थान दिया गया है जिन्हें समाज अक्सर अनदेखा कर देता है या दबाने का प्रयास करता है जैसे घरेलू हिंसा, यौन विकृतियाँ, यौन अभिविन्यास, बलात्कार और यौन शोषण। लेखिका महिलाओं के जीवन के हर पहलू को समझने और सुलझाने का प्रयास करती हैं। प्रत्येक कहानी एक पर्दा उठाती है और पाठक के सामने सत्य को उजागर करती है।
संभव है, पाठक को पुस्तक के पात्र परिचित लगें, क्योंकि यहाँ आप ईश्वर के बनाए सबसे त्यागमयी, सबसे प्रेममयी सृजन से मिलते हैं- वह जिसे हम स्त्री कहते हैं। फिर भी उन अनगिनत स्त्रियों के लिए, जो ऐसी जटिलताओं से गुजरती हैं जिन्हें समझ पाना कठिन है, यह पुस्तक उनके जीवन को छू लेने का बस एक विनम्र प्रयास है।"