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सद्गुरु के दार्शनिक विचार' ऐसी पुस्तक है, जिसमें जीवन, मन, चेतना, आनंद, शांति और आत्मविकास से जुड़े गहरे विचारों को सरल ढंग से प्रस्तुत किया गया है। सद्गुरु का दृष्टिकोण यह है कि जीवन को बेहतर बनाने के लिए बाहरी परिस्थितियों को बदलने से अधिक आवश्यक है कि हम अपने भीतर झाँकें और स्वयं को बदलें। पुस्तक में मनुष्य के विचारों और भावनाओं को समझने, वर्तमान में जीने तथा अपने जीवन की जिम्मेदारी स्वयं लेने पर विशेष जोर दिया गया है। सद्गुरु के अनुसार हमारा अनुभव केवल परिस्थितियों से तय नहीं होता, बल्कि हम उन परिस्थितियों को किस तरह देखते और ग्रहण करते हैं- उन पर निर्भर होता है। हमारी खुशी और शांति को बाहरी वस्तुओं या दूसरे लोगों पर निर्भर नहीं होना चाहिए। जब व्यक्ति अपने भीतर संतुलन और स्पष्टता विकसित करता है, तब वह जीवन की परिस्थितियों के बीच भी अधिक आनंदपूर्वक रह सकता है।
यह पुस्तक उन सुधी पाठकों के लिए है, जो अपने जीवन, मन और स्वयं के अस्तित्व को गहराई से समझकर अपने आप को बदलना चाहते हैं।
स्वाति गौतम बड़े से शहर की एक आम इनसान। पत्र-पत्रिकाओं, समाचार-पत्र और विभिन्न मीडिया हाउसेस में नियमित लेखन। ‘चारु रत्न’ के बाद आनेवाला दूसरा उपन्यास ‘रंगी लाल गली’ तथा अन्य पुस्तकें हैं—‘25 टॉप मोटिवेटर्स के इंसपाइरिंग विचार’, ‘10 महान् व्यक्तियों के 100 महान् विचार’, ‘आध्यात्मिक गुरुओं के प्रेरक विचार’ एवं ‘अरबपति कारोबारियों के मोटिवेशनल विचार’।
इ-मेल : swati.sgautam@gmail.com