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"प्रस्तुत पुस्तक ब्रह्म विद्या व आत्मविद्या का एक सुसंगठित, सुस्पष्ट एवं सारगर्भित प्रकाशपुंज है, जो साधक को अंतर्मुख कर आत्म-जागरण की तत्परता पैदा करती है।
तप, स्वाध्याय, मनोजय, क्षमा, समर्पण, श्रद्धा, सत्यनिष्ठा एवं भगवन् नाम स्मरण जैसे अध्यात्म के मूल स्तंभों का सूक्ष्म विवेचन परमार्थ पथिकों के लिए प्रकाशपुंज का रूप प्रदान करता है।
अयमात्मा ब्रह्म तथा रसस्वरूप ब्रह्म जैसे गूढ़ विषयों के माध्यम से पुस्तक जीव एवं ब्रह्म की अद्वैत चेतना के रहस्य उद्घाटित करती है। भक्त ध्रुव की दिव्य अनुभूतियाँ देव अनुग्रह की महिमा तथा नश्वरता में नित्य तत्त्व की गवेष्णा- ये सभी विषय साधक को भक्ति, ज्ञान और योग के समन्वित पथ पर स्थिर करते हैं।"