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Prashaskeeya Nitishastra (PB)   

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Author Ravinder Shekhawat
Features
  • ISBN : 9789353220273
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information about International Finance: Theory and Policy, 10th ed.

  • Ravinder Shekhawat
  • 9789353220273
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2019
  • 172
  • Soft Cover

Description

विषय-सूची

1. प्रशासनिक नैतिकता —Pgs. 1-3

प्रशासनिक नैतिकता  —Pgs. 1

प्रशासनिक नैतिकता के तीन मूलभूत घटक —Pgs. 2

सिविल सेवा से जुड़ी नैतिक शर्तें या सिद्धांत —Pgs. 2

प्रशासनिक नैतिकता के लिए आवश्यक शर्तें —Pgs. 2

2. नीतिशात्र और परस्पर मानव-व्यवहार —Pgs. 4-7

नीतिशास्त्र की शाखाएं या अध्ययन क्षेत्र —Pgs. 4

तत्व-नीतिशास्त्र —Pgs. 5

नियमात्मक नीतिशास्त्र —Pgs. 6

व्यावहारिक नीतिशास्त्र —Pgs. 6

3. भारत व विश्व के चिंतकों तथा दार्शनिकों का योगदान —Pgs. 8-22

विश्व के प्रमुख नैतिक चिंतक (विचारक) —Pgs. 8

सुकरात —Pgs. 8

प्लेटो —Pgs. 9

प्लेटो का आदर्शवाद —Pgs. 9

अरस्तू  —Pgs. 10

प्लेटो और अरस्तू—एक तुलनात्मक अध्ययन —Pgs. 10

दर्शन-संबंधी अंतर —Pgs. 10

नीतिगत अंतर —Pgs. 11

राजनीतिक दर्शन-संबंधी अंतर —Pgs. 11

इमैनुअल कांट —Pgs. 12

जॉन रॉल्स —Pgs. 12

रॉल्सवाद —Pgs. 13

जेरेमी बेंथम —Pgs. 13

जॉन स्टुअर्ट मिल —Pgs. 14

ऑन लिबर्टी —Pgs. 15

‘द सब्जेक्शन ऑफ वूमन’ —Pgs. 15

रूसो —Pgs. 16

दलाई लामा —Pgs. 17

भारतीय नैतिक विचारक —Pgs. 17

गौतम बुद्ध —Pgs. 17

वर्धमान महावीर —Pgs. 18

स्वामी विवेकानंद —Pgs. 19

भारत के सामाजिक-आध्यात्मिक विकास में स्वामी विवेकानंद का योगदान —Pgs. 19

राजा राममोहन राय —Pgs. 20

मोहनदास करमचंद गांधी —Pgs. 21

गांधीजी का व्यावहारिक आदर्शवाद —Pgs. 21

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन —Pgs. 22

4. सरकारी संस्थाओं में नैतिकता से जुड़ी चिंताएं और भंतियां —Pgs. 23-36

नैतिकता की परिभाषा और महत्व —Pgs. 23

लोक-प्रशासन में नैतिकता —Pgs. 24

नैतिक असमंजस —Pgs. 26

लोक-प्रशासन में नैतिक असमंजस से निपटना —Pgs. 26

नैतिकता के नए आयाम —Pgs. 27

जवाबदेही —Pgs. 27

जवाबदेही या उत्तरदेयता के प्रकार —Pgs. 28

राजनीतिक जवाबदेही —Pgs. 28

नैतिक जवाबदेही —Pgs. 29

प्रशासनिक जवाबदेही —Pgs. 29

संगठनों में व्यक्तिगत जवाबदेही —Pgs. 29

चुनाव आधारित जवाबदेही —Pgs. 30

पब्लिक/प्राइवेट में टकराव —Pgs. 30

समकालीन विकास-विस्तार —Pgs. 30

शिक्षा में जवाबदेही —Pgs. 31

सरकारी व्यवस्था में नैतिकता —Pgs. 32

पेशेवर या व्यावसायिक आचार-संहिता —Pgs. 32

सिविल सेवा में नैतिकता —Pgs. 33

नैतिक संहिता और आचार-संहिता में अंतर —Pgs. 34

नैतिक संहिता —Pgs. 34

आचार-संहिता —Pgs. 34

समानताएं —Pgs. 35

असमानताएं —Pgs. 35

दोनों प्रकार की संहिताओं का समन्वित रूप —Pgs. 35

सरकार और नैतिकता —Pgs. 36

5. केस स्टडीज —Pgs. 37-91

केस स्टडी को समझना —Pgs. 37

केस स्टडी प्रश्नों के उत्तर देने की युत्तिक्त —Pgs. 37

चार चरणों की प्रक्रिया —Pgs. 38

नमूना केस स्टडी-1 —Pgs. 38

नमूना केस स्टडी-2 —Pgs. 39

नमूना केस स्टडी-3 —Pgs. 40

आर.ए.एस. मुख्य परीक्षाः प्रश्न-पत्र-III इकाई-III (भाग-A) प्रशासकीय नीतिशात्र —Pgs. 92-101

परिशिष्ट —Pgs. 103-166

परिशिष्ट-1

भारत में लोक सेवा विधायन का अधिकार —Pgs. 105-106

ढांचा —Pgs. 105

लागू करने वाले राज्य —Pgs. 106

परिशिष्ट-2

नागरिकों को चीजों और सेवाओं को समयबद्ध ढंग से प्रदान करने और उनकी शिकायतों को दूर करने के अधिकार का विधेयक-2011 —Pgs. 107-114

विधेयक के उद्देश्य —Pgs. 107

प्रमुख बातें —Pgs. 107

भाग ए : विधेयक की विशिष्टताएं —Pgs. 108

संदर्भ —Pgs. 108

मुख्य विशेषताएं —Pgs. 109

सार्वजनिक या सरकारी प्राधिकरण —Pgs. 109

जन शिकायत निवारण आयोग —Pgs. 109

शिकायत प्रणाली —Pgs. 109

जुर्माना —Pgs. 111

भाग बी : मुख्य मुद्दे एवं विश्लेषण —Pgs. 111

सरकारी प्राधिकरण के अर्थ पर स्पष्टता का अभाव —Pgs. 112

शिकायत निवारण मंचों की बहुलता —Pgs. 112

गैर-नागरिकों का वर्जन —Pgs. 113

अपील प्रक्रिया में असंगतियां —Pgs. 113

केंद्रीय एवं प्रांतीय शिकायत आयोगों के सदस्यों को हटाया जाना —Pgs. 114

डी.ए. एवं आयोगों की शक्तियों के बीच असंगति —Pgs. 114

परिशिष्ट-3

भारत का नागरिक घोषणा-पत्र एवं शिकायत निवारण विधेयक, 2011 —Pgs. 115-163

जन लोकपाल विधेयक —Pgs. 115

लोकपाल विधेयक —Pgs. 116

समय रेखा एवं लागत —Pgs. 116

वर्तमान भ्रष्टाचार-रोधी कानून एवं संगठन —Pgs. 116

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सी.वी.सी) —Pgs. 116

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सी.बी.आई) —Pgs. 117

प्रेरणा —Pgs. 117

प्रस्तावित विधेयक की प्रमुख खासियतें —Pgs. 117

जन लोकपाल विधेयक के सरकार के एवं कार्यकर्ताओं के मसौदे में अंतर —Pgs. 118

केस उजागर करने वाले (व्हिसल ब्लोअर) की रक्षा एवं नागरिक  —Pgs. 119

घोषणा-पत्र के बारे में सरकार का नजरिया —Pgs. 119

जन लोकपाल विधेयक के लिए अभियान —Pgs. 119

अनशन एवं आंदोलन प्रथम चरण —Pgs. 120

अनशन एवं आंदोलन द्वितीय चरण —Pgs. 120

लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक, 2011 की कठिन परिस्थिति —Pgs. 122

प्रस्तावित विधायन पर संसदीय कार्रवाइयां —Pgs. 123

लोकपाल विधेयक, 2011 —Pgs. 123

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विधेयक को मंजूरी दी —Pgs. 124

लोकसभा में यात्रा —Pgs. 124

राज्य सभा में यात्रा —Pgs. 126

बजट सत्र, 2012 —Pgs. 127

मानसून सत्र, 2012 —Pgs. 128

लोकायुक्त —Pgs. 128

प्रभावशाली बनाने के लिए संवैधानिक संशोधन —Pgs. 128

भारतीय राज्यों में लोकायुक्त/लोकपाल/लोकायोग अधिनियम —Pgs. 129

सुधार —Pgs. 129

संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग पर जोर —Pgs. 129

सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार का संकट —Pgs. 130

लॉर्ड नोलान द्वारा दी गई रिपोर्ट में दिए गए सार्वजनिक जीवन  के सार सिद्धांत —Pgs. 133

(ए) बेनामी सौदा (प्रतिबंध) अधिनियम, 1988 के अनुच्छेद-5  को लागू करने की जरूरत —Pgs. 134

(बी) सरकारी पद में अपकरण-एक उपाय —Pgs. 137

(सी) लोक सेवकों की अवैध रूप से हासिल की गई संपदाओं की  जब्ती के लिए एक कानून बनाए जाने की आवश्यकता —Pgs. 143

उदाहरण (दृष्टांत) —Pgs. 145

(डी) जन हित प्रकटीकरण कानून बनाना —Pgs. 146

सार्वजनिक जीवन में मानक —Pgs. 148

(ई) सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम का बनना —Pgs. 149

(एफ) केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम के अतिरिक्त लोकपाल विधेयक  को कानून बनाने की आवश्यकता —Pgs. 154

लोकपाल की संस्था —Pgs. 154

केंद्रीय सतर्कता आयोग —Pgs. 161

लोक सेवा आयोग बोर्ड —Pgs. 161

केंद्रीय सतर्कता आयोग के सुझाव —Pgs. 162

संयुक्त राज्य अमेरिका के सरकारी अधिनियम में नीति शास्त्र —Pgs. 162

(जी) आपराधिक न्यायिक प्रणाली को मजबूत करना —Pgs. 163

परिशिष्ट-4

भारत का सरकारी गोपनीयता कानून, 1923 —Pgs. 164

अभियोजन और जुर्माना —Pgs. 164

परिशिष्ट-5

अंतर्राष्ट्रीय एन.जी.ओ. उत्तरदायित्व घोषणा-पत्र —Pgs. 165-166

उत्पत्ति —Pgs. 165

The Author

Ravinder Shekhawat

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