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Nai Madhushala   

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Author Sunil Bajpai ‘Saral’
Features
  • ISBN : 9789386300287
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1
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  • Sunil Bajpai ‘Saral’
  • 9789386300287
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1
  • 2017
  • 144
  • Hard Cover

Description

आदरणीय हरिवंशराय ‘बच्चन’  द्वारा लिखित ‘मधुशाला’ से 
प्रेरित होकर लिखी गई इस ‘नई मधुशाला’ 
में कवि सुनील बाजपेयी ‘सरल’ ने जीवन, दर्शन, संसार, नीति, भक्ति, देशभक्ति, 
शृंगार इत्यादि विषयों पर मधुछंदों को प्रस्तुत किया है। यह मधुशाला बच्चनजी द्वारा लिखित मधुशाला के छंदों की लय और छंद-विन्यास के अनुसार ही लिखी गई 
है। हर छंद का अंत मधुशाला शब्द पर ही होता है। प्रत्येक मधुछंद प्रत्यक्ष रूप से मधुशाला का ही वर्णन करता है, किंतु परोक्ष रूप से मधुशाला को माध्यम बनाकर गूढ़ दार्शनिक विचारों को अभिव्यंजित किया गया है। इस पुस्तक को बार-बार पढि़ए। जितनी बार पढ़ेंगे, हर बार और अधिक आनंद की प्राप्ति होगी।   
मुझे चाह थी बन जाऊँ मैं,
एक  सही  पीनेवाला।
मदिरालय में एक बार आ,
कुछ सीखा पीना हाला।
एक बार की कोशिश लेकिन,
पूरा  काम  नहीं  करती; 
पीने में पांडित्य प्राप्त हो,
बार-बार आ मधुशाला॥

 

The Author

Sunil Bajpai ‘Saral’

सुनील बाजपेयी ‘सरल’ का जन्म 22 फरवरी, 1968 को कल्लुआ मोती, लखीमपुर-खीरी (उत्तर प्रदेश) में उनके ननिहाल में हुआ था। बचपन के प्रारंभिक वर्ष अपने नाना स्व. श्री देवीसहाय मिश्र के सान्निध्य में बिताने के बाद वे अपने माता-पिता (श्रीमती विमला बाजपेयी और श्री राम लखन बाजपेयी) के पास लखनऊ आ गए, जहाँ उनकी स्कूली शिक्षा पूरी हुई। फिर सन् 1984 से 1988 तक आई.आई.टी. कानपुर में रहते हुए बी.टेक. की डिग्री अर्जित की। तत्पश्चात् 1990 में आई.आई.टी. दिल्ली से एम.टेक. की पढ़ाई पूरी कर कुछ समय तक भारतीय रेलवे में नौकरी की। सन् 1991 में भारतीय राजस्व सेवा (आई.आर.एस.) ज्वॉइन करने के बाद अब तक आयकर विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे हैं। नौकरी के दौरान सन् 2008 से 2011 के मध्य आई.आई.एम. लखनऊ से प्रबंधन में परास्नातक डिप्लोमा अर्जित किया। संप्रति आयकर विभाग, अलीगढ़ में आयकर आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं। 
अपने विभागीय कार्यों के अतिरिक्त साहित्य और अध्यात्म में भी विशेष रुचि रही है। सन् 2014 में श्रीमद्भगवद्गीता के समस्त श्लोकों का काव्यानुवाद करते हुए ‘गीता ज्ञानसागर’ पुस्तक की रचना की और तब से जगह-जगह पर व्याख्यान देकर गीता के ज्ञान का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। ‘नई मधुशाला’ इनकी द्वितीय काव्य-रचना है।

 

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