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EK AUR MADHUSHALA

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Author Suresh Prasad
Features
  • ISBN : 9789380183435
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 2011
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  • Suresh Prasad
  • 9789380183435
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 2011
  • 2011
  • 104
  • Hard Cover
  • 240 Grams

Description

जिस शराब के प्रबल पक्षपाती विश्‍व के विभिन्न साहित्यों में फिट्जेरॉल्ड,उमर खैयाम और डॉ. हरिवंश राय बच्चन जैसे लब्धप्रतिष्‍ठों ने उसे साहित्यिक मान्यता प्रदान की,वहाँ प्रथमतः डॉ. सुरेश प्रसाद ने मदिरा के प्रतिपक्ष में विज्ञानपूर्ण विचार देकर लोगों को सबल ढंग से इस दुर्गुण से दूर रहने की सलाह दी है।
डॉ. प्रसाद ने मदिरा के विरुद्ध काव्यात्मक आवाज उठाकर मद्यपों का मनोबल बहुत हद तक तोड़ा है। मद्यपान से छुटकारा दिलाने का यह प्रयास सराहनीय है। मदिरा पर आज तक मेरी दृष्‍टि से इस तरह का कोई दूसरा काव्य नहीं गुजरा है। यह कृति स्वाभाविक रूप से लोकप्रिय और चर्चित होगी तथा हिंदी-साहित्य-जगत् एवं लोक-मानस दोनों इसका आदर करेंगे, निःसंदेह ऐसा विश्‍वास है।
डॉ. प्रसाद ने मदिरा की हर अदा को कातिल करार देते हुए प्रतिक्रिया-स्वरूप उस पर कातिलाना हमला बोल दिया है; उसके सारे काले चिट्ठे खोलकर रख दिए हैं दुनिया की आँखों के सामने। ‘मदपायी’ तथा ‘मदिरा-विक्रेता’ पर भी विनम्रता जताते हुए उन्हें मदिरा का साथ देने से मना किया है औचित्य बताते हुए।

The Author

Suresh Prasad

जन्म : 2 जनवरी, 1939 को सोनभद्र के परम पावन तट पर बसे दाऊदनगर, ‘गया’ (अब औरंगाबाद), बिहार में।
शिक्षा : 1953 में प्रवेशिका परीक्षा (मैट्रिक) उत्तीर्ण। बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय से बी.एस-सी. (अंतिम वर्ष) की पढ़ाई के क्रम में ही 1956 में दरभंगा मेडिकल कॉलेज में नामाकंन।
कृतित्व : फुटबॉल के ‘कॉलेज इलेवन’ रहे और एक ‘चित्रकार’ के रूप में बहुचर्चित भी। 1961 में चिकित्सक की डिग्री प्राप्‍त; जिसके बाद एम.डी.(शिशु रोग) के लिए थीसिस लिखी; साथ ही थीसिस (Thesis) की संक्षिप्‍तिका (Summary) सर्वप्रथम लिखकर लोगों को आश्‍चर्य में डाल दिया। बिहार विश्‍वविद्यालय के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ।
दरभंगा से ही इन्होंने डी.सी.पी. तथा डी.टी.एम. ऐंड एच. किया। ‘पूसा’ जिला दरभंगा (अब समस्तीपुर) में करीब 3-4 वर्षों तक स्वतंत्र रूप से मेडिकल प्रैक्टिस की।

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