Dollar Bahoo

Dollar Bahoo   

Author: Sudha Murthy
ISBN: 8173153507
Language: Hindi
Publisher: Prabhat Prakashan
Edition: 1st
Publication Year: 2012
Pages: 178
Binding Style: Hard Cover
Rs. 250
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Description

श्रीमती सुधा मूर्ति जी कन्नड़ भाषा की लोकप्रिय और प्रतिष्‍ठ‌ित लेखिका हैं । हिंदी में प्रकाशित आपका पहला उपन्यास ' महाश्‍वेता ' काफी लोकप्रिय सिद्ध हुआ है । दूसरा उपन्यास ' डॉलर बहू ' भी इसी प्रकार हिंदी का कंठाभरण बनेगा, ऐसी आशा है ।
शामण्णा जी शिक्षक हैं, जो साधारण परिवार के हैं । गौरम्मा उनकी धर्मप्राण धर्मपत्‍नी हैं । इनके दो पुत्र हुए-चंद्रशेखर और गिरीश । एक पुत्री भी है सुरभि । चंद्रशेखर को विनुता से प्रेम हो गया, पर उसे अमेरिका जाना पड़ा । इसी बीच छोटे भाई गिरीश से विनुता का विवाह हो जाता है । चंद्रशेखर का विवाह धनाढ्य घर की बेटी जमुना से हुआ । वे दोनों अमेरिका में ही रहने लगे । जमुना को डॉलर से प्रेम था । गौरम्मा भी सर्वगुण- संपन्न विनुता की अपेक्षा जमुना को डॉलर के कारण अधिक चाहती थी ।
फिर गौरम्मा अपने बेटे और बहू के पास अमेरिका चली जाती है । बहुत दिनों तक वहाँ रहने पर गौरम्मा को अपनी डॉलर बहू और डॉलर-प्रेम से नफरत हो जाती है और वह भारत लौट आती है । अब वह विनुता को महत्त्व देना चाहती है, पर गिरीश और विनुता, दोनों घर छोड़कर अलग शहर में रहने लगे थे । इस प्रकार गौरम्मा के लिए यह कहावत चरितार्थ होती है-' माया मिली, न राम ' ।
भारत लौटकर गौरम्मा कहती है, ' मुझे न वह स्वर्ग चाहिए न वह सुख! हमारा वतन सुंदर है; हमारा गाँव है अच्छा !'. .मुझे तो विनुता की याद सता रही है । '
इस उपन्यास में भारतीय अस्मिता और स्वाभिमान का पुनरुत्थान है । अमेरिका और डॉलर के चाकचिक्य से निभ्रांति इस उपन्यास का केंद्रीय बिंदु है । चरित्रांकण की मार्मिकता और शिल्प का सौष्‍ठव इस उपन्यास के अतिरिक्‍त आकर्षण हैं ।

The Author
Sudha MurthySudha Murthy

सुधा मूर्ति का जन्म सन् 1950 में उत्तरी कर्नाटक के शिग्गाँव में हुआ था। इन्होंने कंप्यूटर साइंस में एम.टेक. किया और अब इन्फोसिस फाउंडेशन की अध्यक्षा हैं। अंग्रेजी और कन्नड़ की एक बहुसर्जक लेखिका। इन्होंने उपन्यास, तकनीकी पुस्तकें, यात्रा-वृत्तांत, कहानी-संग्रह, कथेतर रचनाएँ तथा बच्चों के लिए अनेक पुस्तकें लिखी हैं।
इनकी अनेक पुस्तकों का भारत की सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और पूरे देश में उनकी 4 लाख से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं। इन्हें सन् 2006 में साहित्य के लिए ‘आर.के. नारायण पुरस्कार’ और ‘पद‍्मश्री’ तथा 2011 में कन्नड़ साहित्य में उत्कृष्‍टता के लिए कर्नाटक सरकार द्वारा ‘अट्टिमब्बे पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।

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