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"भारतवर्ष की स्वर्णाभा: नरेंद्र मोदी' एक प्रधानमंत्री के विषय में एक पुस्तक मात्र नहीं, बल्कि एक महापुरुष के जीवन का दर्शन है। यह पुस्तक सामान्य रूप से नरेंद्र दामोदरदास मोदी के व्यक्तित्व मात्र का परिचय ही नहीं कराती, इससे यह भी ज्ञात होता है कि आपके अंदर की ऊर्जा कैसे आपके जीवन को 'सर्वमंगल मांगल्ये', 'सर्व भवन्तु सुखिनः' तथा 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का हेतु बना देती है।
माँ की ममता की छाँव को हर वक्त महसूस करते हुए भी एक व्यक्ति कैसे माँ भारती के लिए स्वयं को समर्पित कर देता है, इसकी बानगी पुस्तक में स्पष्ट देखने को मिलती है। बड़े और कड़े फैसलों के साथ आम लोगों के जनजीवन को समुन्नत करने के उनके कर्तृत्व की झलक इस पुस्तक में मिलती है।
यह पुस्तक राजनीति में रहते हुए आध्यात्मिकता में रचे-बसे एक ऐसे युगपुरुष के बारे में लिखित दस्तावेज है, जिसे युगों तक लोग ईश्वर के विशेष दूत के रूप में याद रखेंगे। राम मंदिर निर्माण से लेकर अनुच्छेद 370 को समाप्त करने, सीमाओं की सुरक्षा करने, भारत को आँख दिखाने वाले देशों को मुँहतोड़ जवाब देने, वैश्विक स्तर पर भारत का मान बढ़ाने और विकसित भारत बनाने के संकल्प की पूर्ति हेतु सतत कर्मशील होकर उन्होंने राष्ट्र-आराधना का जो अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह अप्रतिम है।
अपने अनथक परिश्रम, समर्पण, निष्ठा, राष्ट्रार्पण और 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' से भारतवर्ष की स्वर्णाभा को उद्दीप्त करने वाले राष्ट्र-गौरव यशस्वी नरेंद्र मोदी की कर्मगाथा है यह पुस्तक ।"