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Swatantrata Sangram Mein Rashtriya Swayamsevak Sangh Ki Bhoomika   

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Author Vijay Nahar
Features
  • ISBN : 9789349928053
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Vijay Nahar
  • 9789349928053
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 224
  • Soft Cover
  • 250 Grams

Description

"यह पुस्तक स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका तथा भारत के स्वाधीनता आंदोलन के उस अनदेखे और कम चर्चित आयाम को सामने लाती है, जिसे इतिहास की मुख्यधारा में प्रायः उपेक्षित किया गया। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के क्रांतिकारी जीवन, उनके वैचारिक चिंतन और 1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मूक किंतु सुदृढ़ राष्ट्र-निर्माण यात्रा को यह कृति तथ्यात्मक प्रमाणों और ऐतिहासिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत करती है।

विजय नाहर ने स्पष्ट किया है कि संघ की भूमिका केवल प्रत्यक्ष आंदोलनों तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह समाज को भीतर से संगठित, अनुशासित और स्वाभिमानी बनाने का एक दीर्घकालिक प्रयास था। डॉ. हेडगेवार की क्रांतिकारी पृष्ठभूमि, हिंदुत्व और राष्ट्रीयता का वैचारिक अधिष्ठान, विभाजनकाल की चुनौतियाँ तथा स्वयंसेवकों के योगदान-इन सभी पक्षों को पुस्तक संतुलित और शोधपरक दृष्टि से उद्घाटित करती है।

यह ग्रंथ उन मूक तपस्वियों की गाथा है, जिन्होंने मंच से नहीं, बल्कि परदे के पीछे रहकर राष्ट्र की आधारशिला रखी। यह पुस्तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को स्वतंत्रता संग्राम की उस अंतःसलिला धारा के रूप में प्रस्तुत करती है, जिसने समाज को भीतर से सशक्त बनाया। इतिहास, राष्ट्रवाद और भारत की सांस्कृतिक चेतना में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक विचारोत्तेजक, तथ्यपरक और प्रेरणादायी है।

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The Author

Vijay Nahar

जन्म : 8 नवंबर, 1942, हरनांवा/लाडनूँ में।
शिक्षा : एम.ए. इतिहास।
कर्मक्षेत्र : 25 वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक; राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद् के संस्थापक संगठन मंत्री; राजस्थान प्रौढ़ शिक्षा संस्थान, जयपुर के संस्थापक संगठन मंत्री; राज्य समाज कल्याण बोर्ड के सदस्य; राज्य प्रौढ़ शिक्षा बोर्ड के सदस्य; भारतीय जनसंघ जोधपुर संभाग के संगठन मंत्री रहे; अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के महामंत्री एवं संगठन मंत्री रहे; श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी मानव हितकारी संघ-शिक्षण संस्थान राणावास के निदेशक रहे; आचार्य तुलसी अमृत महाविद्यालय, गंगापुर भीलवाड़ा के निदेशक रहे। संप्रति मरुधर विद्यापीठ समिति, पाली के अध्यक्ष हैं।

 

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