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"प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपने लक्ष्यों की नीतियों को प्राथमिकता देते हुए विश्व के साथ अधिक-से-अधिक संयोजकता (कनेक्टिविटी) की रणनीति का विस्तार किया है। प्राथमिकताएँ तय करते समय स्वहित पर विचार करते हुए निकटतम पड़ोसियों के साथ बढ़ता संचार, सहायता तथा साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। भारत ने मुख्य रूप से विभिन्न कारणों से दक्षिणी समुद्री क्षेत्र की रक्षा पर जोर दिया है। उनके तीनों कार्यकालों के दौरान 'इंडो पैसिफिक' जैसी अवधारणाएँ, 'क्वाड' जैसे वैश्विक मंच और 'इंटरनेशनल सोलर अलायंस. जैसी कई रणनीतिक पहलें शुरू की गईं। अफ्रीका और दक्षिण अमरीकी देशों में भी अधिक-से-अधिक राजनीतिक और अन्य हित-संबंध भी बढ़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के चिंतन में सदैव रहता है कि विदेश नीति का अगला कदम क्या होना चाहिए। विशेष रूप से भारत-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) में चीन का बढ़ता हस्तक्षेप, अफगानिस्तान में नई जटिलताओं, जैसी कई नई उभरती चुनौतियों से आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए भारत कुछ नए हित-संबंध और साझेदारियों में वृद्धि करने पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा।
भारत की पहचान एक ऐसे देश के रूप में बढ़ती जा रही है, जो उन्नत तकनीकी का उत्पादन करता है। उसमें भी डिजिटलीकरण और साइबर सुरक्षा के प्रमुख मुद्दों पर भी अधिक जोर दिया गया है।
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक स्तर पर निर्मित भारतवर्ष की गौरवशाली छवि और आभा का प्रतिबिंब है यह पुस्तक ।"