Bhagonwali

Bhagonwali   

Author: Ramesh Pokhariyal Nishank
ISBN: 9789351862253
Language: Hindi
Publisher: Prabhat Prakashan
Edition: 1st
Publication Year: 2015
Pages: 144
Binding Style: Hard Cover
Rs. 200
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Description

डॉ.रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जितने प्रखर एवं संवेदनशील राजनेता तथा प्रशासक हैं, उतने ही सफल और प्रखर कथाकार व कवि भी हैं। सच कहूँ तो डॉ. ‘निशंक’ जीवन-मूल्यों के सशक्त पक्षधर के साथ-साथ कुशल चितेरे भी हैं।

प्रस्तुत उपन्यास ‘भागोंवाली’ भी डॉ. ‘निशंक’ की शब्द-साधना का ऐसा मनोरम पुष्पगुच्छ है, जिसमें पर्वतीय समाज के साथ-साथ नारी के त्याग, समर्पण और ममत्व की नयनाभिराम झाँकियाँ देखने का सुअवसर पाठकों को मिलेगा।

समर्पित शिक्षक शास्त्रीजी की सहधर्मिणी ‘अम्माँ’ को पहाड़ के लोग इसलिए ‘भागोंवाली’ नाम से पुकारते हैं, चूँकि ‘अम्माँ’ चार-चार ‘बेटों’ की माँ है। ‘अम्माँ’ ही क्या, स्वयं शास्त्रीजी भी अपने ‘चार बेटों’ को ही अपनी सबसे बड़ी पूँजी मानकर गर्वित हैं, लेकिन दैवयोग से सबको ज्ञान देनेवाले शास्त्रीजी के अप्रत्याशित निधन के बाद ‘भागोंवाली अम्माँ’ का बँटवारा कर देनेवाले इन पुत्रों की मर्मभेदी कथा लिखकर डॉ. ‘निशंक’ ने बहुत बड़ा संदेश दिया है।

‘भागोंवाली अम्माँ’ की व्यथा-कथा घोर स्वार्थ के बीच उलझी ममता की हृदयस्पर्शी गाथा के साथ-साथ बेटों को ‘पूँजी’ माननवाले समाज के मुँह पर करारा तमाचा भी है। यह रचना कथाकार डॉ. ‘निशंक’ के हृदय का दर्पण है, जो पाठकों को भावविह्वल कर देगी और उनकी आँखों से गंगा बह निकलेगी।

—डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरुण’

पूर्व सदस्य, केंद्रीय हिंदी साहित्य अकादेमी

74/3, न्यू नेहरू नगर, रुड़की-247667

The Author
Ramesh Pokhariyal NishankRamesh Pokhariyal Nishank

जन्म : 15 अगस्त, 1959 को ग्राम-पिनानी, जनपद-पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड (हिमालय) में।
कृतियाँ : अब तक ढाई दर्जन से अधिक काव्य संकलन, कथा संग्रह व उपन्यास आदि प्रकाशित। ‘ऐ वतन तेरे लिए’ काव्य संकलन का तमिल व तेलुगु व ‘खड़े हुए प्रश्‍न’ कथा संग्रह का तमिल व मराठी में, ‘बस एक ही इच्छा’, ‘प्रतीक्षा’ व ‘तुम और मैं’ कृतियों का जर्मन भाषा, ‘खड़े हुए प्रश्‍न’ कहानी संग्रह का फ्रेंच एवं ‘भीड़ साक्षी है’ का अंग्रेजी में अनुवाद। कई कहानियों का रूसी भाषा में अनुवाद। अनेक विश्‍वविद्यालयों में साहित्य पर शोधकार्य।
सम्मान : राष्ट्रभक्‍त‌ि से ओत-प्रोत उत्कृष्‍ट रचनाओं हेतु तीन बार राष्‍ट्रपति भवन में सम्मानित। ‘डॉक्टर ऑफ साइंस’ व ‘डी.लिट.’ की मानद उपाधि। उत्कृष्‍ट साहित्य सृजन हेतु दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, तमिलनाडु हिंदी अकादमी व भाषा संगम, चेन्नई द्वारा सम्मानित। देश-विदेश की अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक संस्थाओं द्वारा अनेक बार सम्मानित। मॉरीशस में ‘गोपियो अंतरराष्‍ट्रीय सम्मान’ से सम्मानित।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तथा लोकसभा सांसद।

 

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