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"इतिहास में जब भी बड़े स्तर पर परिवर्तन की बात होती है तो उसमें जनता की तरफ से किसी माँग को लेकर क्रांतियों की बड़ी भूमिका रही है। मार्क्सवाद और पूंजीवाद के बीच पिसते इस विश्व को वितरण की सम्यक् दिशा भारत ने दिखाई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव जीतने के बाद यह कहा कि जनता को अब आंदोलनों की आवश्यकता नही है, वह प्रधान सेवक बनकर जनता की सेवा करेंगे।
प्रधानमंत्रीजी ने तेरा तुझको अर्पण भाव से काम करना शुरू किया और संसाधनों के सम्यक् वितरण की भारतीय पद्धति के द्वारा भारतीय समाज के अंतिम व्यक्ति को सशक्त किया। यह भारत के स्वतंत्रता के उपरांत इतिहास में पहली ऐसी घटना थी, जिसमें बिना किसी अशांति, शोर, नारे और आंदोलन के मात्र योजनाओं के कुशल क्रियान्वयन के जरिए कमजोर वर्गों का सशक्तीकरण सरकार द्वारा किया गया।
यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रणीत सरकार की योजनाओं के माध्यम से समाज के रूपांतरण को प्राथमिक आँकड़ों के आधार पर जानने का प्रयास है।"