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Author N. Raghuraman
Features
  • ISBN : 9789350484739
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 2013
  • ...more

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  • N. Raghuraman
  • 9789350484739
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 2013
  • 2013
  • 160
  • Hard Cover
  • 330 Grams

Description

आज सूचनाक्रांति के युग में जब हमें अनेक स्रोतों से हर क्षण सूचनाएँ और नई-नई जानकारियाँ मिल रही हैं तो ऐसे में जरूरत है कि हम इन जानकारियों में से सबसे श्रेष्‍ठ को चुनकर अपनी सफलता के लिए उपयोग करें।
ईश्‍वर ने केवल मनुष्य को बुद्धि के रूप में दुर्लभ वस्तु प्रदान की है। जरूरत है कि हम इस बुद्धि का अच्छा और सकारात्मक उपयोग कर अपने जीवन में प्रगति के पथ पर अग्रसर हों।
प्रस्तुत पुस्तक में ऐसी अनेक प्रेरणादायी कहानियाँ संकलित हैं, जिससे आप औरों से हटकर, अपने काम को स्मार्ट तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं। इसलिए सचेत रहिए, होशियार बनिए और जानकारियों के रथ पर सवार होकर सफल बनिए।
इस पुस्तक में बताए कुछ फंडे हैं—
अच्छी सलाह आपको अपने किसी ऐसे पड़ोसी से भी मिले, जिसके प्रति आप अलग राय रखते हों, लेकिन इसे लेने में हर्ज नहीं है, क्योंकि यह अपनी जिंदगी में अहिंसा को अपनाने जैसा है।
अगले कुछ सालों में दुनिया समेत आपके जीवन में आमूलचूल बदलाव होने जा रहे हैं। इन बदलवों के बारे में जानकारी रखना जरूरी है। भले ही इन तकनीकी विकासों का उपभोग आप न करें, लेकिन इनके बारे में जानकारी आपको समाज में आगे रखेगी।
उत्तेजित होने के बजाय एक शांत दिमाग बेहतर सोच सकता है। अपने मस्तिष्क को हर दिन कुछ मिनट के लिए पूरी तरह शांत छोड़ दीजिए और फिर देखिए कि यह आपको आपकी इच्छाओं के अनुरूप जिंदगी जीने में कितनी मदद करता है।

The Author

N. Raghuraman

मुंबई विश्‍वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट और आई.आई.टी. (सोम) मुंबई के पूर्व छात्र श्री एन. रघुरामन मँजे हुए पत्रकार हैं। 30 वर्ष से अधिक के अपने पत्रकारिता के कॅरियर में वे ‘इंडियन एक्सप्रेस’, ‘डीएनए’ और ‘दैनिक भास्कर’ जैसे राष्‍ट्रीय दैनिकों में संपादक के रूप में काम कर चुके हैं। उनकी निपुण लेखनी से शायद ही कोई विषय बचा होगा, अपराध से लेकर राजनीति और व्यापार-विकास से लेकर सफल उद्यमिता तक सभी विषयों पर उन्होंने सफलतापूर्वक लिखा है। ‘दैनिक भास्कर’ के सभी संस्करणों में प्रकाशित होनेवाला उनका दैनिक स्तंभ ‘मैनेजमेंट फंडा’ देश भर में लोकप्रिय है और तीनों भाषाओं—मराठी, गुजराती व हिंदी—में प्रतिदिन करीब तीन करोड़ पाठकों द्वारा पढ़ा जाता है। इस स्तंभ की सफलता का कारण इसमें असाधारण कार्य करनेवाले साधारण लोगों की कहानियों का हवाला देते हुए जीवन की सादगी का चित्रण किया जाता है।
श्री रघुरामन ओजस्वी, प्रेरक और प्रभावी वक्‍ता भी हैं; बहुत सी परिचर्चाओं और परिसंवादों के कुशल संचालक हैं। मानसिक शक्‍ति का पूरा इस्तेमाल करने तथा व्यक्‍ति को अपनी क्षमता के अधिकतम इस्तेमाल करने के उनके स्फूर्तिदायक तरीके की बहुत सराहना होती है।

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