Oonchi Udaan Ki Ore

Oonchi Udaan Ki Ore   

Author: Ram Buxani
ISBN: 9788173156816
Language: Hindi
Publisher: Prabhat Prakashan
Edition: 1st
Publication Year: 2009
Pages: 228
Binding Style: Hard Cover
Rs. 300
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Description

बहुआयामी व्यक्‍तित्व के धनी श्री राम बक्सानी की आत्मकथा पढ़कर अत्यंत आनंद का अनुभव होता है। निज-जीवन की कथा कहने का उनका ढंग अत्यंत निराला है। इसमें वह अनेक सिंधी परिवारों के इतिहास व भावनाओं का चित्रण करते हैं। बचपन के बेफिक्र दिनों से लेकर भारत के बँटवारे की भयावहता और विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करके सिंधी समुदाय की सफलताओं को समेटे उनकी गाथा पाठक की कल्पना को उद्दीप्‍त करती है। उनके अनुसार सफलता सिंधी समुदाय के लोगों का पर्याय बन चुकी है।
ऊँची उड़ान की ओर में एशिया के दो सर्वाधिक उन्नत देशों—दुबई और जापान की विशेष चर्चा है। दुबई में 43 वर्षों से रह रहे श्री बक्सानी ने इन दोनों प्रगतिशील देशों के उत्थान के इतिहास को दर्ज किया है। इस प्रयास में उन्होंने सिंधी समाज की उद्यमशीलता व रोमांच की भावना की समतुल्यता भी स्थापित की है।
सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है कि श्री राम बक्सानी एक पुत्र हैं, पति हैं, पिता हैं, और पितामह भी। उन्हें अपने जीवन से प्यार है, लेकिन वह जानते हैं कि अपने जीवन की यात्रा का अधिकांश भाग वह पूर्ण कर चुके हैं। अपनी उपलब्धियों का सिंहावलोकन करते हुए उनके दार्शनिक विचार वर्तमान को समृद्ध करते हैं और कल की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं। यही इस पुस्तक का सारतत्त्व है, जो पाठकों की कल्पना और कर्मठता को जाग्रत् करेगा।
दुबई में बसे प्रवासी समुदाय में अनेक व्यक्‍तित्व ऐसे हैं, जिन्हें न केवल उनकी सफलता व समाज में हैसियत की दृष्‍टि से बल्कि उनके कार्यों व सद्गुणों के कारण भी नेता की भाँति देखा जाता है।
श्री राम बक्सानी एक सफल व्यवसायी और स्नेही मित्र, दोनों हैं। उनका जीवन 40 से भी अधिक वर्ष पहले दुबई पहुँचने और सुनहरे भविष्य का सपना साकार करने की सफल कहानी है। वह पति हैं और पिता भी, एक सफल व्यवसायी हैं, सिंधी समाज के महत्त्वपूर्ण स्तंभ हैं, एक उद्यमी और सफल प्रवासी भारतीय हैं और अत्यंत मुखर किंतु सहयोग देने को तत्पर प्रवासी भी, जिसने संयुक्‍त अरब अमीरात के विकास व प्रगति में अतुलनीय योगदान दिया है।
विदेशों में बसे भारतीय समुदाय को सम्मान दिलाने की आवश्यकता की मुहिम का श्री बक्सानी ने सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है। भारत व संयुक्‍त अरब अमीरात के बीच परस्पर सहयोग की शुरुआत कराने में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई है।
पुस्तक में उन्होंने अपनी जीवन-गाथा का चित्रण किया है—उस काल से, जब दुबई विकास के पथ पर बढ़ रहा था और आज तक, जब दुबई एक अत्याधुनिक शहर बन गया है। बतौर नागरिक वह साधिकार घोषणा करते हैं—“दुबई मेरा घर है। मैंने इससे बहुत कछ प्राप्‍त किया है। मैं इसे जो कुछ भी लौटाऊँगा, वह अत्यंत अल्प होगा। और भारत मेरी मातृभूमि है—यह मेरा दोहरा सौभाग्य है।”
यह कथा है उस व्यक्‍ति की जिसने अपनी सोच और समझ से निर्णय लिये... और सदा ऊँची उड़ान भरने को तत्पर रहा।

The Author
Ram BuxaniRam Buxani

श्री राम बक्सानी एक सफल व्यवसायी और स्नेही मित्र, दोनों हैं। उनका जीवन 40 से भी अधिक वर्ष पहले दुबई पहुँचने और सुनहरे भविष्य का सपना साकार करने की सफल कहानी है। वह पति हैं और पिता भी, एक सफल व्यवसायी हैं, सिंधी समाज के महत्त्वपूर्ण स्तंभ हैं, एक उद्यमी और सफल प्रवासी भारतीय हैं और अत्यंत मुखर किंतु सहयोग देने को तत्पर प्रवासी भी, जिसने संयुक्‍त अरब अमीरात के विकास व प्रगति में अतुलनीय योगदान दिया है।

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