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Nirdhan Ka Ann

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Author Arun Kumar Tiwari
Features
  • ISBN : 9789350481943
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information about International Finance: Theory and Policy, 10th ed.

  • Arun Kumar Tiwari
  • 9789350481943
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2012
  • 168
  • Hard Cover
  • 345 Grams

Description

खाद्य सुरक्षा बढ़ाना और छोटे किसानों की फसल बाजार तक समय से पहुँचाकर उन्हें उनके श्रम का सही मूल्य दिलवाना, एक वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और प्रशासक के रूप में डॉ. विलियम दर के प्रमुख लक्ष्य रहे हैं।
उनकी आत्मकथा ‘निर्धन का अन्न’ में वंचितों के प्रति चिंता को आवाज देने के लिए व्यक्‍तिगत अनुभवों का सहारा लिया गया है। इसमें कृषि जगत् के महत्त्वपूर्ण मुद‍्दे शामिल किए गए हैं। विशेष रूप से ‘अनाथ फसलों’ और ‘छिपी भूख’ के अभिनव सिद्धांतों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। विश्‍व के सात अरब लोगों में से एक अरब से भी अधिक भुखमरी से ग्रस्त या कुपोषित हैं। इस पुस्तक में समकालीन कृषि को प्रभावित करनेवाले राजनीतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मुद‍्दों—सीमा-शुल्क तथा कृषि सब्सिडी, जल प्रदूषण, जैविक ईंधन, जैनेटिक रूप से परिष्कृत संरचनाओं के पहलुओं और समस्याओं, मशीनी खेती के विरुद्ध बढ़ते विरोध तथा टिकाऊ तरीकों के प्रति बढ़ती प्रासंगिकता की गंभीरता से जाँच-परख की गई है।
सन् 2050 तक विश्‍व की जनसंख्या 9 अरब से अधिक हो जाने का अनुमान है। डॉ. दर का यह निष्कर्ष महत्त्वपूर्ण है कि निर्धन को भी अन्न मिले, इसके लिए सिर्फ प्रौद्योगिकी और विज्ञान ही व्यावहारिक समाधान नहीं हैं—कृषि प्रबंधन की सोच में बदलाव, ठोस नीतियों और संस्थाओं के कुशल संचालन की भी महती आवश्यकता है।

The Author

Arun Kumar Tiwari

पूर्व मिसाइल वैज्ञानिक प्रो. अरुण तिवारी ने भारत की सेटैलाइट आधारित प्रथम टेली मेडिसन सेवा शुरू की थी। सन् 1987 से उन्होंने रचनात्मक विज्ञान लेखन प्रारंभ किया और अनेक पुस्तकें लिखीं, जिनमें डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के साथ लिखी बेस्टसेलर पुस्तकें ‘अग्नि की उड़ान’, ‘आरोहण’ व ‘हमारे पथ प्रदर्शक’ प्रमुख हैं।अरुण कुमार तिवारी बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं और केयर फाउंडेशन, हैदराबाद के निदेशक हैं।

 

William Dollente Dar
Arjun Tiwari

अंग्रेजी तथा हिंदी में स्नातकोत्तर उपाधिधारी डॉ. अर्जुन तिवारी ने जनसंचार में पी-एच.डी. की है। पत्रकारिता से आरंभ कर अध्यापन में प्रवृत्त हुए और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष पद से अवकाश ग्रहण किया। पत्रकारिता पर उनकी 21 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं।

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