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Kuchh Alpa Viraam   

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Author Sachchidanand Joshi
Features
  • ISBN : 9789386871541
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : Ist
  • ...more

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  • Sachchidanand Joshi
  • 9789386871541
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • Ist
  • 2018
  • 144
  • Hard Cover

Description

‘कुछ अल्प विराम’ को साहित्य की किसी एक विधा के खाँचे में डालकर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि यह विधाओं की परिधि को तोड़कर जिंदगी की सच्चाई से सीधा संबंध जोड़ती है। इसमें जीवन के उन सभी छोटे-बड़े प्रसंगों को इकट्ठा करने की कोशिश की है, जो गुदगुदाते हैं, हँसाते हैं, रुलाते हैं, कभी हल्की सी चपत लगाते हैं और कभी चिकोटी काट लेते हैं। सबकुछ उतना ही जितना जरूरी है, हमें हमारी असमय नींद या तंद्रा से जगाने के लिए काफी है। कभी लघुकथा के माध्यम से, तो कभी किस्से के माध्यम से और कभी-कभी संस्मरण के माध्यम से। जरूरी नहीं कि जिंदगी का हर सबक, हर समय किसी भारी भरकम शास्त्रीय किताब से ही सीखा जाए। जिंदगी के छोटे से प्रसंग भी कई बार बड़ा सबक सिखा जाते हैं। ऐसे ही प्रसंगों को जो हमारे जीवन में अल्प विराम की तरह हैं, बेहद सरल भाषा और सहज शैली में सँजोकर प्रस्तुत करने की कोशिश है, ‘कुछ अल्प विराम’।

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अनुक्रम

भूमिका : एक अल्प विराम यह भी—7

1. अपना बाज बहादुर—13

2. बालश्रम—18

3. भाई दूज—24

4. भ्रूण हत्या—32

5. छोटी सी आशा—36

6. देने-देने में फर्क—42

7. देनहार कोहू और है... 48

8. धर्म निरपेक्षता—52

9. हवाई यात्रा—57

10. काम तो काम है—62

11. करवा चौथ और अमेरिकी चुनाव—67

12. खून का रिश्ता—72

13. किराए के महापुरुष—79

14. लेडी श्रवण कुमार—85

15. मैन प्रपोजेस—91

16. मेहँदी में छिपा दर्द—97

17. मन में भाव सही हो—102

18. नीयत—108

19. सब दिन होत न एक समाना—114

20. सचमुच स्थितप्रज्ञ—120

21. वृद्धाश्रम—126

22. विदेश में हिंदी के अनुभव—131

23. सहिष्णुता—136

24. स्वतंत्रता दिवस—140

The Author

Sachchidanand Joshi

सच्चिदानंद जोशी
जन्म : 9 नवंबर, 1963
पत्रकारिता एवं जनसंचार शिक्षा के क्षेत्र में अपने प्रदीर्घ अनुभव के साथ विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं में कार्य। कलात्मक क्षेत्रों में अभिरुचि के कारण रंगमंच, टेलीविजन तथा साहित्य के क्षेत्र में सक्रियता। पत्रकारिता एवं संचार के साथ-साथ संप्रेषण कौशल, व्यक्तित्व विकास, लैंगिक समानता, सामाजिक सरोकार और समरसता, चिंतन और लेखन के मूल विषय। देश के विभिन्न प्रतिष्ठानों में अलग-अलग विषयों पर व्याख्यान। कविता, कहानी, व्यंग्य, नाटक, टेलीविजन धारावाहिक, यात्रा-वृत्तांत, निबंध, कला समीक्षा इन सभी विधाओं में लेखन। एक कविता-संग्रह ‘मध्यांतर’ बहुत चर्चित हुआ। पत्रकारिता के इतिहास पर दो पुस्तकों का प्रकाशन। प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक ‘सच्चिदानंद जोशी की लोकप्रिय कहानियाँ’ को भी अच्छा प्रतिसाद मिला। बत्तीसवें वर्ष में विश्वविद्यालय के कुलसचिव और बयालीसवें वर्ष में विश्वविद्यालय के कुलपति होने का गौरव। देश के दो पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े होने का श्रेय। भारतीय शिक्षण मंडल केराष्ट्रीय अध्यक्ष।
संप्रति : इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली में सदस्य सचिव।
संपर्क : sjoshi09@yahoo.com • 9205500164 • 9425507715
प्रियंका रतूड़ी
प्रियंका रतूड़ी (7 मार्च, 1980) ने प्रबंधन शास्त्र में स्नातकोत्तर करने के बाद अपने प्रशिक्षण संस्थान द रोड अहेड (ञ्जद्धद्ग क्त्रशड्डस्र ्नद्धद्गड्डस्र) की बुनियाद रखी। अपनी रचनात्मकता के चलते प्रशिक्षण के दौरान कॉरपोरेट जगत् में कई नए एवं रोचक प्रयोग किए। बचपन से ही चित्रकारी की तरफ रुझान, कुछ वर्ष पहले कैनवास एवं कागज पर चित्र उतारना शुरू किए। स्वाभ्यास एवं सीख से अब अपने चित्रों की प्रदर्शनी एवं किताबों के लिए चित्रांकन।
संपर्क : priyankaadityaraturi@gmail.com

 

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