Prabhat Prakashan, one of the leading publishing houses in India eBooks | Careers | Publish With Us | Dealers | Download Catalogues
Helpline: +91-7827007777

Krantikari Kosh - I   

₹400

Out of Stock
  We provide FREE Delivery on orders over ₹1500.00
Delivery Usually delivered in 5-6 days.
Author Shrikrishna Saral
Features
  • ISBN : 8173152322
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information about International Finance: Theory and Policy, 10th ed.

  • Shrikrishna Saral
  • 8173152322
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2012
  • 300
  • Hard Cover

Description

इस श्रमसिद्ध व प्रज्ञापुष्‍ट ग्रंथ क्रांतिकारी कोश में भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास को पूरी प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है ।
सामान्यतया भारतीय स्वातंत्र्य आदोलन का काल 1857 से 1942 ई. तक माना जाता है; किंतु प्रस्तुत ग्रंथ में इसकी काल- सीमा 1757 ई. (प्लासी युद्ध) से लेकर 1961 ई. (गोवा मुक्‍त‌ि) तक निर्धारित की गई है । लगभग दो सौ वर्ष की इस क्रांति- यात्रा में उद‍्भट प्रतिभा, अदम्य साहस और त्याग-तपस्या की हजारों प्रतिमाएँ साकार हुईं । इनके अलावा राष्‍ट्रभक्‍त कवि, लेखक, कलाकार, :व‌िद्वान् और साधक भी इसी के परिणाम-पुष्प हैं ।
पाँच खंडों में विभक्‍त पंद्रह सौ से अधिक पृष्‍ठों का यह ग्रंथ क्रांतिकारियों का प्रामाणिक इतिवृत्त प्रस्तुत करता है । क्रांतिकारियों का परिचय अकारादि क्रम से रखा गया है । लेखक को जिन लगभग साढ़े चार सौ क्रांतिकारियों के फोटो मिल सके, उनके रेखाचित्र दिए गए हैं । किसी भी क्रांतिकारी का परिचय ढूँढने की सुविधा हेतु पाँचवें खंड के अंत में विस्तृत एवं संयुक्‍त सूची (सभी खंडों की) भी दी गई है ।
भविष्य में इस विषय पर कोई भी लेखन इस प्रामाणिक संदर्भ ग्रंथ की सहायता के बिना अधूरा ही रहेगा ।

__________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________

अनुक्रम

(प्रथम स्वाधीनता संग्राम युग (सन् 1770 से 1857 तक), यूरोप तथा एशिया में भारत के क्रांतिकारी तथा महाराष्ट्र का चाफेकर बंधु युग एवं बंग-भंग युग के क्रांतिकारी)

 

सूफी अंबाप्रसाद — Pgs. 25 नरेंद्रनारायण चक्रवर्ती — Pgs. 168
सरदार अजीतसिंह — Pgs. 29 नानासाहब पेशवा — Pgs. 170
अजीमुल्ला खाँ — Pgs. 33 वीर नारायणसिंह — Pgs. 171
अनंत लक्ष्मण कान्हरे कृष्ण गोपाल कर्वे विनायक नारायण देशपांडे — Pgs. 38 नाहरसिंह — Pgs. 175
अनंतहरि मित्र प्रमोदरंजन चौधरी — Pgs. 41 पांडुरंग महादेव वापट — Pgs. 178
सेठ अमरचंद बाँठिया — Pgs. 46 पुलिनबिहारी दास — Pgs. 180
अमरसिंह — Pgs. 48 प्रफुल्लचंद्र चक्रवर्ती — Pgs. 183
अमरसिंह हरियाणवी — Pgs. 50 बहादुरशाह जफर और उसके बेटे — Pgs. 186
अरविंद घोष — Pgs. 51 भागीरथ वारगीर — Pgs. 188
अल्लूरी सीताराम राजू — Pgs. 56 भास्कर राव बाबासाहब नरगुंदकर — Pgs. 189
रानी अवंतीबाई — Pgs. 59 मदाम भीकाजी कामा — Pgs. 191
अवनीनाथ मुकर्जी — Pgs. 61 वीरांगना भीमाबाई — Pgs. 203
अशोक नंदी — Pgs. 64 भूपेंद्रनाथ दत्त — Pgs. 204
मौलवी अहमदुल्ला — Pgs. 66 मंगल पांडे — Pgs. 208
इंदुभूषण रे — Pgs. 68 मदनलाल धींगरा — Pgs. 210
उदमीराम — Pgs. 72 मौलवी महमूद-उल-हसन मौलाना मोहम्मद बरकतुल्ला  — Pgs. 220
उपेंद्रनाथ बंद्योपाध्याय — Pgs. 73 राजा महेंद्रप्रताप — Pgs. 225
उल्लासकर दत्त जितेंद्रनाथ राय — Pgs. 76 मैना — Pgs. 232
सरदार ऊधमसिंह — Pgs. 81 रंगो बापूजी गुप्ते — Pgs. 237
कन्हाईलाल दत्त सत्येंद्रनाथ बसु — Pgs. 85 रघुनाथशाह शंकरशाह — Pgs. 238
ठाकुर किशोरसिंह रघुनाथ राव — Pgs. 88 ठाकुर रणमतसिंह — Pgs. 240
वीर कुँअरसिंह — Pgs. 89 जगत्सेठ रामजीदास गुड़वाला — Pgs. 241
खुदीराम बोस प्रफुल्लकुमार चाकी — Pgs. 92 गुरु रामसिंह — Pgs. 242
गणेश दामोदर सावरकर — Pgs. 98 रिचर्ड विलियम्स — Pgs. 245
गुलाबराव चिमनलाल महाराणा बख्तावरसिंह बशीर उल्ला खाँ — Pgs. 99 रिषीकेश लट्टा — Pgs. 246
गौतम डोरे मल्लू डोरे  — Pgs. 104 महारानी लक्ष्मीबाई — Pgs. 249
चंपक रमन पिल्लई — Pgs. 106 लोहार गुंडा — Pgs. 255
चारुचंद्र बोस  — Pgs. 110 संत वरयामसिंह — Pgs. 256
चिदंबरम् पिल्लै पद्मनाभ आयंगार सुब्रह्मण्यम शिव — Pgs. 112 वांची अय्यर — Pgs. 257
रानी चेन्नम्मा — Pgs. 114 वारींद्रकुमार घोष  — Pgs. 260
कुँअर चैनसिंह बहादुर खाँ हिम्मत खाँ — Pgs. 118 वासुदेव बलवंत फड़के — Pgs. 265
जोगेंद्रनाथ चक्रवर्ती — Pgs. 123 विनायक दामोदर सावरकर — Pgs. 270
वीरांगना झलकारी पूरनसिंह — Pgs. 127 विशनसिंह — Pgs. 274
ताँतिया दोपिया बिजनिया — Pgs. 131 वीरेंद्रनाथ चट्टोपाध्याय — Pgs. 275
तात्या टोपे — Pgs. 138 वीरेंद्रनाथ दत्त — Pgs. 279
तिरुमल आचार्य — Pgs. 143 वेलू थंपी — Pgs. 282
तिलका माँझी — Pgs. 145 श्यामजी कृष्ण वर्मा — Pgs. 284
दामोदर चाफेकर बालकृष्ण चाफेकर महादेव रानडे वासुदेव चाफेकर — Pgs. 148 सआदत खाँ — Pgs. 288
देवी सिंह सरजूप्रसाद सिंह — Pgs. 155 सरदारसिंह राणा — Pgs. 289
देवेंद्र सेन गुप्ता — Pgs. 156 सुरेंद्र साय — Pgs. 291
महाराज नंदकुमार — Pgs. 158 सुशीलकुमार सेन — Pgs. 293
नरपतिसिंह — Pgs. 164 मिस्त्री हलकूराम — Pgs. 297
नरेंद्रनाथ भट्टाचार्य (मानवेंद्रनाथ राय) — Pgs. 165 हेमचंद्र दास कानूनगो — Pgs. 298

The Author

Shrikrishna Saral

जन्म : १ जनवरी, ११११ को अशोक नगर, गुना ( मप्र.) में ।
श्रीकृष्ण सरल उस समर्पित और संघर्षशील साहित्यकार का नाम है, जिसने लेखन में कई विश्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं । सर्वाधिक क्रांति-लेखन और सर्वाधिक महाकाव्य ( बारह) लिखने का श्रेय सरलजी को ही जाता है ।
श्री सरल ने एक सौ सत्रह ग्रंथों का प्रणयन किया । नेताजी सुभाष पर तथ्यों के संकलन के लिए वे स्वयं खर्च वहन कर उन बारह देशों का भ्रमण करने गए जहाँ -जहाँ नेताजी और उनकी फौज ने आजादी की लड़ाइयों लड़ी थीं ।
श्रीकृष्ण सरल स्वयं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे तथा प्राध्यापक के पद से निवृत्त होकर आजीवन साहित्य-साधना में रत रहे । उन्हें विभिन्न संस्थाओं द्वारा ' भारत- गौरव ', ' राष्‍ट्र-कवि ' ,, ' क्रांति-कवि ', ' क्रांति-रत्‍न ', ' अभिनव- भूषण ', ' मानव- रत्‍न ', ' श्रेष्‍ठ कला- आचार्य ' आदि अलंकरणों से विभूषित किया गया ।
निधन : 1 सितंबर, 2000 को ।

Customers who bought this also bought

WRITE YOUR OWN REVIEW