Kathghare Se

Kathghare Se   

Author: Dhirendra Narayan Singh
ISBN: 9788193397480
Language: Hindi
Publication Year: 2017
Pages: 136
Binding Style: Hard Cover
Rs. 250
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Description

मैं सुखी राम। कैदी नंबर पाँच सौ बत्तीस। कठघरे से बोल रहा हूँ। जो भी सुन रहे हों, मेरे घरवालो को इत्तला दे दें, मैं यहाँ अच्छी तरह हूँ। पक्का मकान है। बरसात में छप्पर चूने का भय नहीं। सवेरे चाय मिल जाती है। नाश्ते में चना-गुड़ और भोजन के लिए पूछो मत। सप्ताह में मांस, मछली और अंडे भी मिल जाते हैं। रोटी, चावल, चने की दाल और हरी सब्जी प्रतिदिन का भोजन है।
ओढ़ने और बिछाने को दो कंबल, पहनने को कपड़े, साबुन और तेल, सबकुछ मिलता है।
कह दें गिरधारी से, कर दे हरिकिशन का खून और चले आएँ जेल। इस प्रजातंत्र 
में घर की व्यवस्था से जेल की व्यवस्था अच्छी है।
—इसी संग्रह से
मन को झकझोर देनेवाली मर्मस्पर्शी व संवेदनशील कहानियों का संकलन, जिन्हें पढ़कर आप भावुक हो जाएँगे और आपकी संवेदना झंकृत हो जाएगी।

The Author
Dhirendra Narayan SinghDhirendra Narayan Singh

जन्म : 24 जून, 1942 को मुरलीगंज, मधेपुरा (बिहार) में।
शिक्षा : बी.एस-सी. एंड  डिप्लोमा इन ऐजुकेशन। बलदेव लक्ष्मी इंटर स्तरीय विद्यालय, मुरलीगंज से अवकाश प्राप्त शिक्षक।
प्रकाशन : खरीद लीजिए (कविता-संग्रह)।
पुरस्कार-सम्मान : राजभाषा बिहार सरकार मंत्रिमंडल सचिवालय द्वारा दो बार पुरस्कृत। हिंदी-उर्दू एकता मंच, सीतामढ़ी द्वारा पुपरी विभूषण सम्मान से सम्मानित। हिंदी साहित्य परिषद् खगडि़या द्वारा स्वर्ण सम्मान। भू.ना.मं. विश्वविद्यालय, मधेपुरा द्वारा कोशी साहित्य सेवी सम्मान। अन्य कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित।
संपर्क : मुरलीगंज, वार्ड-10, मधेपुरा-852122
चलितवार्त्ता : 7763882860

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