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Delhi Ki Anusuchit Jatiyan Va Aarakshan Vyavastha   

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Author Ramesh Chander
Features
  • ISBN : 9789384343422
  • Language : Hindi
  • ...more

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  • Ramesh Chander
  • 9789384343422
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 2016
  • 144
  • Hard Cover

Description

संविधान निर्मात्री सभा को स्पष्ट था कि यदि हिंदू समाज और देश चाहता है कि देश का प्रत्येक नागरिक सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक व शैक्षणिक विकास करे तो इन अनुसूचित जातियों के लिए विशेष विकासपरक प्रावधान करने होंगे और इसी विकास की आकांक्षा में संविधान में अनुसूचित जातियों के लिए राजनैतिक, नौकरियों इत्यादि क्षेत्रों में आरक्षण की व्यवस्था की गई।
प्रस्तुत लघु पुस्तक में उन परिस्थितियों की संक्षेप में चर्चा की गई है, जिसने हमारे संविधान निर्माताओं को आरक्षण व्यवस्था को लागू करने के लिए प्रेरित किया। इसी प्रकार पुस्तक में अभागे अछूतों (जो आज दलित या अनुसूचित जातियाँ कहलाते हैं) के प्रति अमानवीय परंपराओं व भेदभावपूर्ण नीतियों की चर्चा की गई है, जिसके चलते समाज का एक बड़ा हिस्सा गर्त में चला 
गया था।
पुस्तक को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि समाज के सभी वर्गों (कर्मचारी, अधिकारी, प्रमाण-पत्र प्रार्थी व अन्य सभी) को दिल्ली की अनुसूचित जातियों के बारे में सही मूलभूत जानकारी मिले, जिससे आरक्षण नीति के औचित्य एवं इसे सही ढंग से लागू करने व समाज को समझने में मदद मिले। ऐसी अनेकों जातियाँ हैं, जिनसे हम अनभिज्ञ हैं। विश्वास है कि इस पुस्तक से इन जातियों के बारे में यह अनभिज्ञता दूर होगी।

 

The Author

Ramesh Chander

जन्म : सादुलपुर-राजगढ़ (जिला चुरू) राजस्थान में। 
शिक्षा : दिल्ली विश्वविद्यालय से वाणिज्य स्नातक। 
बैंक ऑफ बड़ौदा में परिवीक्षाधीन अधिकारी के रूप में तैनाती, फिर भारतीय राजस्व सेवा के सदस्य बने। गुजरात में आयकर विभाग में नौकरी के दौरान ही गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद के प्रतिष्ठित विधि महाविद्यालय ‘सर एल.ए. शाह लॉ कॉलेज’ से विधि स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
कृतित्व : आयकर कानून के विशिष्ट ज्ञान के साथ-साथ कानून की अन्य विधाओं (यथा संवैधानिक, विधि, उपभोक्ता कानून) में विशेष दखल। विधिक विषयों पर व्याख्यान देने के साथ-साथ लेख लिखते रहते हैं, जो समय-समय पर जानी-मानी विधि रिपोर्ट्स में प्रकाशित होते हैं। समय-समय पर भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की अनेकों समितियों में शामिल हो अपने विधि ज्ञान से अपना योगदान देते हैं।
ये स्वयं को समाज-विज्ञानी कहलाना पसंद करते हैं और अपनी पैनी नजर तथा पैठ से समसामयिक विषयों को गंभीरता व नवीनता प्रदान करते हैं। 
संप्रति भारत सरकार, आयकर विभाग में आयकर आयुक्त।

 

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