Amangalhari

Amangalhari   

Author: Viveki Rai
ISBN: 8185829942
Language: Hindi
Publisher: Prabhat Prakashan
Edition: 1st
Publication Year: 2010
Pages: 140
Binding Style: Hard Cover
Rs. 150
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Description

...अमृतसर के पास मजदूर बस्ती छहरता । मजदूर खुशी में घरों से निकले हैं कि लड़ाई बंद हो गई । साढ़े चार बजे लोग यह सुनना चाहते हैं कि अब क्या कह रहे हैं जनरल साहब । ठीक उसी समय एक सैबरजेट नीचे उड़ान भरते हुए झपटता आता है और सर्वनाश की तरह इस प्रकार घहरा उठता है कि बाजार ईंट-पत्थरों की ढेरी के रूप में परिवर्तित हो जाता है । आदमियों के स्थान पर मांस के लोथड़े और शरीर के टुकड़े दिखाई पड़ने लगे । टेलीफोन और बिजली के खंभों पर मांस के टुकड़े चिपके हुए मिले । उस समय इतिहास ने हाथ उठाकर ऐलान किया था.
कुछ स्थितियाँ तो बहुत विचित्र लग रही थीं कि उस पाकिस्तानी बुनियादी जनतंत्र के नाम पर हजार-हजार पौंड के और साढ़े बारह- बारह मन के बम झोंके जा रहे थे, सो भी कहाँ-कहाँ? लहलहाती फसलों पर, आबादी पर, अस्पताल पर, घायल मरीजों पर, बीमार और कराहते औरतों और बच्चों पर, मंदिर- धर्मशालाओं पर, चर्च और गुरुद्वारों पर ।
भला वैसे पवित्रात्मा देशभक्‍त शहीद को भूत-प्रेत या जिन होना चाहिए? लेकिन नहीं, भीतर एक कामना एक वासना, एक उद‍्देश्य की आग दहक रही थी, जिसे लेकर वह जिन बन गया और पूर्ति के लिए सुयोग्य पात्र चुन लिया । सचमुच, भारत माता की खोज का उद‍्देश्य कितना महान् है! इस बेहाल-हाल में बेचारा जगदीश उस उद‍्देश्य को उसीकी भाषा में दुहरा रहा है ।
वे पैदल-पैदल साइकिल ढिमलाते धीरे- धीरे आगे बड़े । कुछ आगे जाकर फिर छवर के किनारे धूल पर भारत का नक्‍‍शा बना प्रतीत हुआ । इसमें कच्छ की खाड़ी और बिलोचिस्तानवाली लाइन सुरक्षित थी । शेष आने-जानेवाले पैदल आदमी के पैरों अथवा साइकिल आदि से खनकर हंडभंड हो गया था । बिलोचिस्तानवाली लाइन देखकर मास्टर साहब के होंठों पर मुसकान फूट गई ।
-इसी उपन्यास से

The Author
Viveki RaiViveki Rai

जन्म : 19 नवंबर, 1924, गाँव-भरौली, जिला-बलिया (उ.प्र.)।

काव्य : अर्गला, रजनी गंधा, यह जो है गायत्री ।
कहानी संग्रह : जीवन परिधि, गूँगा जहाज, नई कोयल, कालातीत, बेटे की बिक्री, चित्रकूट के घाट पर, विवेकी राय की श्रेष्‍ठ कहानियाँ ।
उपन्यास : बबूल, पुरुष पुराण, लोकऋण, श्‍वेतपत्र, सोनामाटी, समर शेष है, मंगल भवन, नमामि ग्रामम् अमंगलहारी ।
ललित निबंध : फिर बैतलवा डाल पर, जलूस रुका है, गँवई गंध गुलाब, मनबोध मास्टर की डायरी, नया गाँवनामा, मेरी श्रेष्‍ठ व्यंग्य रचनाएँ, आम रास्ता नहीं है, जगत् तपोवन सो कियो ।
निबंध और शोध समीक्षा : त्रिधारा, गाँवों की दुनिया, किसानों का देश, अध्ययन आलोक, स्वातंत्र्योत्तर कथा -साहित्य और ग्राम-जीवन, हिंदी।

उपन्यास : उत्तरशती की उपलब्धियाँ, हिंदी कहानी : समीक्षा और संदर्भ, समकालीन हिंदी उपन्यास, हिंदी उपन्यास : विविध आयाम, आस्था और चिंतन।
भोजपुरी साहित्य : के कहल चुनरी रँगाल (ललित निबंध), जनता के पोखरा (काव्य), भोजपुरी कथा- साहित्य के विकास (समीक्षा), ओझइती (कहानी संग्रह), गंगा-जमुना-सरस्वती (विविध विधा), अड़बड़ भइया की भोजपुरी चिट्ठी (फीचर) ।

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