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Vivekanand Aur Rashtravad

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Author Parshuram Gupt
Features
  • ISBN : 9789383111343
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 2013
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  • Parshuram Gupt
  • 9789383111343
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 2013
  • 2018
  • 152
  • Hard Cover
  • 300 Grams

Description

स्वामी विवेकानंद के जन्म को डेढ़ सदी बीत चुकी है। लेकिन आज भी उनके संदेश युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं। संपूर्ण राष्‍ट्र के भविष्य की दिशा तय करने में भी उनके विचार निर्णायक भूमिका का निर्वहण करने की क्षमता रखते हैं। आज वेदांत-दर्शन को विज्ञान की मान्यता मिलने लगी है, जिससे स्वामीजी के विचार और भी प्रासंगिक हो गए हैं।
स्वामीजी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा था कि निराशा, कमजोरी, भय, आलस्य तथा ईर्ष्या युवाओं के सबसे बड़े शत्रु हैं। उन्होंने युवाओं को जीवन में लक्ष्य निर्धारण करने के लिए स्पष्‍ट संदेश दिया और कहा कि तुम सदैव सत्य का पालन करो, विजय तुम्हारी होगी। आनेवाली शताब्दियाँ तुम्हारी बाट जोह रही हैं। उन्होंने कहा था कि हमें कुछ ऐसे युवा चाहिए, जो देश की खातिर अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार हों। ऐसे युवाओं के माध्यम से वे देश ही नहीं, विश्‍व को भी संस्कारित करना चाह रहे थे।
स्वामीजी प्रखर राष्‍ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे। उनका मानना था कि राष्‍ट्र के प्रति गौरवबोध से ही राष्‍ट्र का कल्याण होगा। हिंदू संस्कृति, समाजसेवा, चरित्र-निर्माण, देशभक्‍ति, शिक्षा, व्यक्‍तित्व तथा नेतृत्व इत्यादि के विषय में स्वामीजी के विचार आज अधिक प्रासंगिक हैं।
स्वामीजी के संपूर्ण मानवता और राष्‍ट्र को समर्पित प्रेरणाप्रद जीवन का अनुपम वर्णन है—राष्‍ट्ररक्षा, राष्‍ट्रगौरव एवं राष्‍ट्राभिमान का पाठ पढ़ानेवाली, राष्‍ट्रवाद का अलख जगानेवाली इस अत्यंत जानकारीपरक पुस्तक में।

The Author

Parshuram Gupt

जन्म : 30 अगस्त,1953 को रायबरेली जिले के सलोन नगर में।
शिक्षा : स्नातकोत्तर (इलाहाबाद वि.वि.), पी-एच.डी. (गोरखपुर वि.वि.)।
प्रकाशन : ‘गुरिल्ला युद्ध कर्म’, ‘परमाणु निरस्‍‍त्रीकरण’, ‘राष्‍ट्रीय सुरक्षा और भारतीय विदेश नीति’, ‘वर्तमान रक्षा तंत्र’, ‘सैन्य मनोविज्ञान’, ‘स्‍‍त्रातेजिक भूगोल’, ‘अमेरिका, ब्रिटेन तथा चीन का रक्षा तंत्र’, ‘महान् स्‍‍त्रातेजिक चिंतक : समर्थ रामदास’, ‘राष्‍ट्रीय सुरक्षा तथा सांस्कृतिक एकता’, ‘जनपद महराजगंज के बौद्ध स्थल’, ‘राष्‍ट्र रक्षक॒: महाराजा सुहेल देव’, ‘राष्‍ट्रगौरव : सम्राट् हेमचंद्र विक्रमादित्य’, ‘नक्सल विद्रोह॒: समस्या एवं समाधान’, ‘पूर्वांचल के गांधी’, ‘War & Environmental Security’. कई समाजसेवी तथा सांस्कृतिक संगठनों में महत्त्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहण तथा जनपदीय उपभोक्‍ता फोरम के सदस्य रहे।
सम्मान : शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्‍ट योगदान हेतु ‘दैनिक जागरण’ परिवार द्वारा सम्मानित। एन.सी.सी. अधिकारी के नाते महानिदेशक, राष्‍ट्रीय कैडेट कोर द्वारा तथा सन् 2012 में राष्‍ट्रपति द्वारा सम्मानित। ‘गुरिल्ला युद्ध कर्म’ एवं ‘परमाणु निरस्‍‍त्रीकरण’ कृतियों को भारत सरकार का राष्‍ट्रीय पुरस्कार।
संप्रति : जवाहरलाल नेहरू स्मारक पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, महराजगंज (उ.प्र.) में एसोशिएट प्रोफेसर तथा रक्षा एवं स्‍‍त्रातेजिक अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष।

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