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"भारत की सभ्यता और संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता रही है। विभिन्न धर्मों, भाषाओं, परंपराओं और सामाजिक समूहों से निर्मित भारतीय समाज ने सदियों से संवाद, सह-अस्तित्व और पारस्परिक सम्मान के मूल्यों को आत्मसात् किया है। किंतु बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में अनेक बार ऐसे अवसर आए, जब संवाद की कमी ने भ्रम, अविश्वास और दूरी को जन्म दिया। ऐसे समय में सार्थक संवाद ही वह माध्यम बनता है, जो मतभेदों को समझ में और समझ को समाधान में परिवर्तित कर सकता है।
विचार, 'संवाद से समाधान तक विमर्श और विश्वास' इसी विश्वास की कहानी है। यह पुस्तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं अखिल भारतीय इमाम संगठन के साझा चलाए जा रहे संवाद, संपर्क और विश्वास निर्माण की प्रक्रिया का दस्तावेज प्रस्तुत करती है।
यह पुस्तक केवल घटनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि संवाद की उस संस्कृति का अध्ययन भी है, जो लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला है। साथ ही इस तथ्य को भी रेखांकित करती है कि राष्ट्र निर्माण का मार्ग टकराव नहीं, बल्कि संवाद, सहभागिता और परस्पर सम्मान से होकर गुजरता है।
समकालीन भारत में सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक सद्भाव के प्रश्नों पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करती यह पुस्तक शोधार्थियों, धार्मिक नेतृत्वों, नीति-निर्माताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा सामान्य पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी है। यह पुस्तक संवाद की शक्ति और उसकी परिवर्तनकारी क्षमता का सशक्त प्रमाण है।"